जिस संस्थान से बनते हैं डॉक्टर, वहीं हॉस्टल के 92 कमरों पर ‘कब्जा’; 3 बार चिट्ठी लिखने के बाद भी नहीं खाली हुए कमरे
जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के 108 में से 92 कमरों पर अवैध कब्जा है, जिससे नए इंटर्न डॉक्टरों को आवास संकट का सामना करना पड़ रहा है।

एमजीएम कॉलेज प्रशासन द्वारा तीन बार पत्राचार किए जाने के बावजूद हॉस्टल खाली नहीं हो सका।
HighLights
एमजीएम हॉस्टल के 92 कमरों पर अवैध कब्जा।
नए इंटर्न डॉक्टरों को आवास की समस्या।
जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की गई।
अमित तिवारी, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के हॉस्टल की स्थिति वर्तमान में संस्थान के अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रही है।
जिस प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़कर छात्र डॉक्टर बनते हैं, उसी के हॉस्टल के 92 कमरों पर अनधिकृत कब्जा जमा हुआ है।
कॉलेज प्रशासन द्वारा तीन बार पत्राचार किए जाने के बावजूद जब कमरे खाली नहीं कराए जा सके, तो अब यह मामला जिला प्रशासन के चौखट तक पहुंच गया है।
108 में से केवल 16 कमरे ही नियमानुकूल आवंटित
कॉलेज का साकची स्थित इंटर्न हॉस्टल नंबर-एक और नंबर-दो कुल मिलाकर 108 कमरों की क्षमता रखता है। अस्पताल व कॉलेज प्रशासन द्वारा तैयार की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, इनमें से केवल 16 कमरे ही नियमानुसार वर्तमान इंटर्न छात्रों को आवंटित हैं।
शेष 92 कमरों पर ऐसे लोगों का अनधिकृत कब्जा है, जिन्हें वर्तमान व्यवस्था के तहत वहां रहने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।
तीन बार पत्राचार, फिर भी प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
हॉस्टल खाली कराने की कवायद में अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने पूर्वी सिंहभूम के अनुमंडल पदाधिकारी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र के मुताबिक, कॉलेज प्रशासन की ओर से पूर्व में भी 25 नवंबर 2025, 2 अप्रैल 2026 और 8 मई 2026 को इस संबंध में पत्राचार किया जा चुका है।
महीनों से अनधिकृत कब्जे की जानकारी होने और लगातार पत्राचार के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होना कॉलेज प्रबंधन की ढचर-पचर कार्यशैली और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
रिकॉर्ड में कोई और, कमरे में रह रहा कोई और
प्रबंधन की जांच में यह बात सामने आई है कि अवैध रूप से रह रहे कई पूर्व छात्र अब निजी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं, तो कुछ उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जा चुके हैं।
इसके बावजूद उन्होंने कमरों पर ताला लगा रखा है या अपना कब्जा नहीं छोड़ा है। ऐसे में हॉस्टल के प्रत्येक कमरे का पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन किए जाने की सख्त जरूरत है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आवंटन किसके नाम पर था और वर्तमान में वहां कौन काबिज है।
नए इंटर्न डॉक्टरों के सामने बड़ा संकट
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार के अनुसार, मुख्य परिसर में एमबीबीएस छात्रों के हॉस्टल का मरम्मत कार्य चल रहा है। नियमत: वहां रह रहे इंटर्न डॉक्टरों को साकची हॉस्टल में शिफ्ट किया जाना है।
लेकिन 92 कमरों पर अवैध कब्जा होने के कारण नए बैच के इंटर्न्स के लिए रहने की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
जिन डॉक्टरों के कंधों पर स्वास्थ्य व्यवस्था का जिम्मा है, वे ही अपनी मूलभूत आवासीय जरूरतों के लिए भटकने को मजबूर हैं।
आंतरिक प्रबंधन में विफलता के कारण जिला प्रशासन से मदद की नौबत
हॉस्टल आवंटन और अनुशासन लागू करने की व्यवस्था कॉलेज प्रशासन के पास होने के बावजूद बाहरी प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ना, संस्थान की आंतरिक अक्षमता को उजागर करता है।
यदि नियम लागू कराने के लिए अनुमंडल प्रशासन की मदद अनिवार्य है, तो सवाल उठता है कि पिछले तीन पत्रों पर त्वरित संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?
फिलहाल, जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ही हॉस्टल खाली होने और नए इंटर्न डॉक्टरों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
