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Gandhi Jayanti: तार-तार बापू का संसार; जमशेदपुर खादी भंडार का एसी ठप, घर से कूलर लाकर ड्यूटी कर रहे कर्मचारी

Published: Thu, 01 Oct 2026 07:00 AM (IST)

जमशेदपुर का खादी भंडार गांधी जयंती से पहले प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का शिकार है, जहां कर्मचारियों को चार महीने ...और पढ़ें

बिष्टुपुर खादी ग्रामोद्योयोग भंडार में आठ कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें विगत चार महीनों से एक पैसे का मानदेय नहीं मिला है।

बिष्टुपुर खादी ग्रामोद्योयोग भंडार में आठ कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें विगत चार महीनों से एक पैसे का मानदेय नहीं मिला है।

HighLights

  1. जमशेदपुर खादी भंडार गांधी जयंती से पहले प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार।

  2. कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नहीं, एसी खराब, घर से कूलर।

  3. झारखंड के 85 से अधिक खादी बोर्ड कर्मचारी भी इसी संकट में।

जासं, जमशेदपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती से ठीक दो दिन पहले लौहनगरी जमशेदपुर का प्रमुख खादी भंडार गहरे प्रशासनिक अवसाद का शिकार दिख रहा है। 
 
‘खादी’ को देश के गरीबों के स्वावलंबन का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बिष्टुपुर स्थित झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य केंद्र की स्थिति आज अत्यंत बदहाल हो चुकी है।
 

भव्य जीर्णोद्धार से बदहाली के दलदल तक 

यह वही खादी भंडार है, जिसका जीर्णोद्धार कर तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भव्य लोकार्पण किया था। उस समय दावा किया गया था कि यह केंद्र ग्रामीण बुनकरों व शिल्पियों की आर्थिक रीढ़ बनेगा। 
 
लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण स्थिति बिगड़ती गई। संजय सेठ के हटने के बाद से बोर्ड में किसी स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिससे पूरा तंत्र नेतृत्व विहीन हो गया है।
 

4 महीने से मानदेय बंद, घर से कूलर ला रहे कर्मचारी 

बिष्टुपुर भंडार में कार्यरत आठ कर्मचारियों को पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार सामने हैं, लेकिन कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 
 
यह समस्या सिर्फ जमशेदपुर की नहीं है, पूरे झारखंड में खादी बोर्ड के 85 से अधिक कर्मचारी इसी संकट से जूझ रहे हैं।
 
इसके अलावा, शोरूम का सेंट्रलाइज्ड एसी पिछले चार सालों से खराब है। भीषण उमस के बीच कर्मचारी अपने घरों से प्राइवेट कूलर लाकर काम करने को मजबूर हैं। 
 
रैक से सामान नदारद हैं और गांधी जयंती पर दी जाने वाली पारंपरिक छूट की अधिसूचना भी अंतिम समय तक फाइलों में ही अटकी रही।

सीईओ का पद पांच माह से रिक्त होने के कारण पूरी व्यवस्था ध्वस्त है और वेतन भुगतान रुका है। निदेशक ने छूट की मौखिक सहमति दे दी है। दो अक्टूबर से सभी वस्त्रों पर छूट मिलेगी, जिसकी अधिसूचना गुरुवार को जारी होगी।

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दीनदयाल शर्मा, प्रबंधक, खादी भंडार बिष्टुपुर

चार महीने से वेतन नहीं मिला। दुर्गापूजा सिर पर है, दुकानदार उधारी राशन देने से मना कर रहे हैं। बिना पंखे-एसी की घुटन में काम कर रहे हैं, पर बोर्ड हमारी सुध नहीं ले रहा।

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अनिता हांसदा, कर्मी

शोरूम का एसी चार साल से बंद है। भीषण गर्मी देख ग्राहक बिना खरीदारी किए उल्टे पांव लौट जाते हैं। मजबूरी में घर से कूलर लाए हैं। बिना मानदेय अब परिवार भुखमरी के कगार पर है।

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सुमन पिंगुआ, कर्मी

गांधी जयंती हमारी बिक्री का सबसे बड़ा पर्व होती थी, लेकिन आज शो-रूम में नया माल तक नहीं है। चार माह से खाली पेट रखकर हम बापू के खादी का प्रचार कैसे करें?

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सुभाष प्रसाद, कर्मी