प्रदूषण पर सख्त हुआ प्रदूषण नियंत्रण पर्षद, टाटा स्टील समेत जमशेदपुर के 12 बड़े संस्थानों को अल्टीमेटम
झारखंड प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने जमशेदपुर में डीजल जनरेटरों से बढ़ते प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाया है। पर्षद ने औद्योगिक ...और पढ़ें

पर्षद ने टाटा स्टील समेत शहर के 12 प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर प्रदूषण नियंत्रण मानकों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।
HighLights
जमशेदपुर में प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने डीजल जनरेटर पर सख्ती की।
टाटा स्टील समेत 12 बड़े संस्थानों को प्रदूषण नोटिस जारी।
6 माह में उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाना अनिवार्य किया गया।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । शहर में डीजल जनरेटरों (DG Sets) से निकलने वाले जहरीले धुएं को लेकर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (JSPCB) ने सख्ती की है।
पर्षद ने टाटा स्टील समेत शहर के 12 प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर प्रदूषण नियंत्रण मानकों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मिली जानकारी के आधार पर झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन ने यह मामला उठाया है।
इन 12 प्रमुख प्रतिष्ठानों को जारी हुआ नोटिस
झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा के अनुसार, पर्षद द्वारा नोटिस प्राप्त करने वाले प्रमुख संस्थानों में शामिल हैं:
टाटा स्टील, टीआरएफ, टाटा पिगमेंट, एसटीपी लिमिटेड, शिवा प्लास्टिक, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और टेल्को
अस्पताल: टाटा मेन अस्पताल (TMH), टाटा मोटर्स अस्पताल और टिनप्लेट अस्पताल
व्यावसायिक प्रतिष्ठान: होटल साउथ पार्क और मिथिला मोटर्स
इन सभी प्रतिष्ठानों को जनरेटरों से होने वाले धुएं और उत्सर्जित हानिकारक कणों को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त तकनीकी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली कटने पर ये जनरेटर वैकल्पिक स्रोत बनते हैं, लेकिन इनसे निकलने वाले सूक्ष्म कण (PM) और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें हवा को प्रदूषित करती हैं।
इससे सांस की बीमारियां, अस्थमा, और बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। पर्षद ने नोटिस में जनरेटरों की क्षमता के अनुसार रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण (Retrofit Emission Control Devices) लगाने सहित अन्य अनुमत तकनीकी विकल्प अपनाने को कहा है, जिससे हानिकारक उत्सर्जन को कम किया जा सके।
उल्लंघन पर 25 हजार रुपये प्रतिदिन तक का मुआवजा
RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण निर्देशों का उल्लंघन करने पर जनरेटर की क्षमता और लापरवाही के आधार पर 7,500 रुपये, 15,000 रुपये और 25,000 रुपये प्रतिदिन तक का पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation) वसूलने का प्रावधान है।
सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस मिलने की तिथि से 6 महीने (180 दिन) के भीतर निर्देशों का पालन करने की समयसीमा दी गई है।
झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा, "स्वच्छ हवा में सांस लेना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
उउन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और रोजगार जरूरी हैं, लेकिन पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की कीमत पर नहीं। प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को कागजों से निकालकर धरातल पर पूरी सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
अब शहर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित संस्थान दिए गए 180 दिनों में क्या कदम उठाते हैं और पर्षद इसकी कैसी निगरानी करता है।
