जमशेदपुर, जासं। रेमडेसिवीर इंजेक्शन की किल्लत हो गई है। जमशेदपुर के निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों को इंजेक्शन के लिए भटकना पड़ रहा है। टेल्को स्थित टाटा मोटर्स अस्पताल, बारीडीह स्थित मर्सी व नेशनल हाइवे स्थित उमा हॉस्पिटल के मरीजों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है।

चिकित्सक मरीज के परिजन को लाने के लिए बोल देते हैं लेकिन कहां से मिलेगा इसके बारे में कोई नहीं बताया। जबकि अस्पताल प्रबंधन को ही यह इंजेक्शन मरीजों को उपलब्ध कराना है। रोजाना इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं, इंजेक्शन नहीं मिलने की शिकायत को लेकर झारखंड ह्यूमन राईट्स कांफ्रेंस (जेएचआरसी) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार को पत्र लिखकर संज्ञान लेने की मांग की है।

विभाग से नहीं मिल रहा इंजेक्शन

उमा अस्पताल के संचालक डॉ. ओम प्रकाश का कहना है कि रेमडेसिवीर इंजेक्शन की जितनी मांग की जाती है, उतनी नहीं मिल पाती है। जिसके कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। रेमडेसिवीर इंजेक्शन की सप्लाई रांची स्थित ड्रग कंट्रोलर रितू सहाय द्वारा की जाती है। इधर, बारीडीह स्थित मर्सी अस्पताल की लापरवाही भी सामने आ रही है। मर्सी अस्पताल की ओर से अभी तक इंजेक्शन की मांग भी नहीं की गई है। जबकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, टाटा मोटर्स अस्पताल को भी जरूरत के अनुसार इंजेक्शन नहीं मिल रहा है।

इनकी भी सुनें

हमारी कोशिश मरीजों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। इस क्षेत्र में प्रयास भी किया जा रहा है। बेड बढ़ाने से लेकर रेमडेसिवीर इंजेक्शन सबकुछ उपलब्ध कराया जा रहा है।

- बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य मंत्री

मरीजों को बेड, दवा व ऑक्सीजन नहीं मिल पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इलाज के अभाव में मरीजों की मौत हो रही है। इसे लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा गया है। ताकि इस मामले को संज्ञान में ले सकें।

- मनोज मिश्रा, अध्यक्ष, झारखंड ह्यूमन राईट्स कांफ्रेंस।

 

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