हरितालिका तीज और गणेश उत्सव का अद्भुत संयोग: 15 सितंबर को सुबह 8 से पहले करना होगा पारण
इस वर्ष हरितालिका तीज और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव 14 सितंबर को एक ही दिन मनाया जाएगा, जिससे जमशेदपुर में भारी उत्साह है।

सनातन धर्म में उदया तिथि की सर्वोपरि मान्यता के आधार पर सोमवार को ही व्रत रखा जाएगा।
HighLights
हरितालिका तीज और गणेश उत्सव 14 सितंबर को एक साथ।
उदया तिथि के कारण तीज व्रत 14 सितंबर को मान्य।
चौरचन पर्व पर स्यमंतक मणि कथा का श्रवण।
जासं, जमशेदपुर। भाद्रपद शुक्ल पक्ष में सुहागिनों का अखंड सौभाग्य पर्व हरितालिका तीज और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव इस वर्ष एक ही दिन 14 सितंबर (सोमवार) को मनाया जाएगा।
काशी पंचांग के अनुसार, यद्यपि इस बार तीज पर हस्त नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है, लेकिन सनातन धर्म में उदया तिथि की सर्वोपरि मान्यता के आधार पर सोमवार को ही व्रत रखा जाएगा।
इसी दिन मिथिलांचल और बिहार की परंपरा के अनुसार माताएं चौरचन (चौठ चंद्र) पर्व मनाएंगी और संध्या काल में चंद्रदेव को अर्घ्य देकर स्यमंतक मणि की पौराणिक कथा सुनेंगी।
पुरोहितों ने दी तिथि और नक्षत्र की जानकारी
छोटा गोविंदपुर स्थित श्रीराम मंदिर के पुरोहित देवानंद पांडेय और मुकेश तिवारी ने काशी पंचांग के हवाले से बताया कि इस वर्ष तृतीया तिथि में हस्त नक्षत्र का योग नहीं मिल रहा है।
इसके बावजूद उदया तिथि मान्य होने के कारण सुहागिन महिलाएं 14 सितंबर को ही भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए हरितालिका तीज का कठिन निर्जला व्रत रखेंगी।
चतुर्थी तिथि और गणेश उत्सव का योग
इस व्रत का पारण अगले दिन 15 सितंबर (मंगलवार) को सुबह 7:54 बजे से पूर्व कर लेना अनिवार्य है। पुरोहितों के अनुसार, तृतीया तिथि के समापन के तुरंत बाद चतुर्थी का प्रवेश हो जाएगा।
शास्त्रों में गणेश चतुर्थी व्रत और गणपति स्थापना में चंद्रोदय व्यापिनी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। उदया और चंद्रोदय व्यापिनी तिथि का यह अद्भुत संयोग 14 सितंबर को ही प्राप्त हो रहा है, जिससे इसी दिन से गणेश उत्सव का उल्लासपूर्वक शुभारंभ होगा।
कलंक मुक्ति के लिए सुनी जाएगी स्यमंतक मणि की कथा
पंडित देवानंद पांडेय ने बताया कि गणेश चतुर्थी को मिथिलांचल क्षेत्र में 'चौरचन' पर्व के रूप में उत्साह से मनाया जाता है। व्रती महिलाएं शाम को गणपति और चंद्र देव का पूजन करती हैं।
ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी का चांद देखने से झूठा कलंक लगता है। इस दोष के निवारण हेतु महिलाएं स्यमंतक मणि की कथा सुनती हैं और चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित कर परिवार के कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
एक ही दिन दो बड़े प्रमुख पर्वों का संयोग बनने से लौहनगरी जमशेदपुर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और बाजारों में पूजन सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है।
