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जमशेदपुर: स्वर्णरेखा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, मोहरदा में 75 करोड़ की लागत से बनेगा STP

Published: Thu, 05 Mar 2026 10:37 PM (GMT+05:30)

जमशेदपुर में पर्यावरण संरक्षण और सीवेज प्रबंधन के लिए मोहरदा में 75 करोड़ रुपये की लागत से 44 एमएलडी क्षमता ...और पढ़ें

मोहरदा में प्रस्तावित 44 एमएलडीक्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का डायग्राम।

मोहरदा में प्रस्तावित 44 एमएलडीक्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का डायग्राम।

HighLights

  1. मोहरदा, जमशेदपुर में 44 एमएलडी एसटीपी को मिली स्वीकृति।

  2. स्वर्णरेखा नदी प्रदूषण मुक्त होगी, चार नाले साफ होंगे।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर में पर्यावरण संरक्षण और सीवेज प्रबंधन की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) के अंतर्गत मोहरदा में प्रस्तावित 44 एमएलडी (MLD) क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। 

एक महीने के भीतर शुरू होगा निर्माण कार्य

लगभग 75 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य सरकार से प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। जमशेदपुर अक्षेस के उप प्रशासक कृष्ण कुमार ने जानकारी दी कि विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) को मंजूरी मिलने के बाद अब टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। 
 
उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक माह के भीतर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। यह प्लांट न केवल शहर के सीवेज प्रबंधन को सुधारेगा, बल्कि स्वर्णरेखा नदी के अस्तित्व को बचाने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। 

चार बड़े नालों का गंदा पानी होगा फिल्टर 

मोहरदा में बनने वाले इस एसटीपी के जरिए जमशेदपुर के उन चार बड़े नालों को टारगेट किया गया है, जो सीधे स्वर्णरेखा नदी में गिरते हैं। इनमें शामिल हैं:

  •     मोहरदा नाला
  •     भोजपुर घाट नाला
  •     बागनुहातु घाट नाला
  •     जिला स्कूल नाला


इन सभी नालों के जरिए आने वाले दूषित पानी को पाइपलाइन के माध्यम से पहले प्लांट तक लाया जाएगा। यहां वैज्ञानिक तरीके से उपचार (Treatment) होने के बाद ही पानी को नदी में छोड़ा जाएगा।

स्वर्णरेखा नदी के प्रदूषण पर लगेगा लगाम 

वर्तमान में घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी, मल-मूत्र और अन्य अपशिष्ट सीधे स्वर्णरेखा नदी में प्रवाहित होते हैं। इससे नदी का जलस्तर न केवल प्रदूषित हो रहा है। 
 
जलीय जीवों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। 44 एमएलडी क्षमता वाला यह प्लांट चालू होने के बाद नदी में गिरने वाले कचरे की मात्रा नगण्य हो जाएगी, जिससे जल की गुणवत्ता में व्यापक सुधार आएगा।

एसटीपी के निर्माण से नदियों के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, सफाई और अन्य सार्वजनिक कार्यों में दोबारा किया जा सकता है। इस परियोजना से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। 

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कृष्ण कुमार, उप प्रशासक, जमशेदपुर अक्षेस