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जमशेदपुर में ड्राई डे पर खुली शराब की अवैध मंडी: गाड़ियों तक पहुंचाई जा रही मनमाने दाम पर पसंदीदा ब्रांड और चखना

Published: Thu, 22 Oct 2026 12:39 AM (IST)

ड्राई डे के दिन जमशेदपुर के स्लैग रोड पर अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चलता रहा, जहाँ ग्राहकों को गाड़ियों तक मनमाने दाम पर शराब और चखना पहुंचाया गया।

दुकानों के बंद होने के बावजूद सड़क किनारे शराब खरीदने वालों की इस कदर भीड़ जुटी कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का तांता लग गया।

दुकानों के बंद होने के बावजूद सड़क किनारे शराब खरीदने वालों की इस कदर भीड़ जुटी कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का तांता लग गया।

HighLights

  1. ड्राई डे पर स्लैग रोड पर अवैध शराब बिक्री।

  2. गाड़ियों तक मनमाने दाम पर शराब की होम डिलीवरी।

  3. पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत या उदासीनता पर सवाल।

जासं, जमशेदपुर। सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के स्लैग रोड पर नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आईं। ड्राई डे के दिन भी यहां अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह गुलजार रहा। 

 
दुकानों के बंद होने के बावजूद सड़क किनारे शराब खरीदने वालों की इस कदर भीड़ जुटी कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का तांता लग गया। जिला प्रशासन और पुलिस के दावों के विपरीत यह अवैध कारोबार खुलेआम संचालित होता रहा।
 
इस अवैध बाजार की सबसे बड़ी खासियत इसकी होम डिलीवरी जैसी चुस्त व्यवस्था है। ग्राहकों को शराब खरीदने के लिए किसी दुकान या काउंटर तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। 
 
स्लैग रोड पर गाड़ी रोकते ही दुकान के लड़के तुरंत ग्राहक के पास पहुंच जाते हैं। ब्लेंडर्स प्राइड, बकार्डी, सिग्नेचर, रॉयल स्टैग, रॉयल चैलेंज से लेकर नंबर-1 और विभिन्न ब्रांड की बीयर तक ग्राहकों को गाड़ी पर ही उपलब्ध कराई जा रही है। 
 
हालांकि, इस सुविधा के एवज में ग्राहकों को निर्धारित खुदरा मूल्य से 50 से 100 रुपये तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
 
यह काला कारोबार किसी सुनियोजित सेवा की तरह चलाया जा रहा है। यहां तक कि गाड़ी के पास पहुंचने वाले लड़कों को पुराने ग्राहकों की पसंद और उनके पसंदीदा ब्रांड तक जुबानी याद रहते हैं। 
 
ग्राहक की मांग मिलते ही शराब की बोतलों के साथ-साथ पानी की बोतल, पैकेज्ड चखना, सिगरेट और डिस्पोजेबल गिलास भी तुरंत गाड़ी तक पहुंचा दिए जाते हैं। 
 
ग्राहकों की सहूलियत के लिए भुगतान को डिजिटल क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा भी उपलब्ध रहती है, जिससे खरीदारों को नकदी या खुले पैसों के लेन-देन की चिंता नहीं करनी पड़ती।
 
ड्राई डे पर जब तमाम शराब दुकानें पूरी तरह बंद थीं, तब इतनी बड़ी मात्रा में शराब की यह अवैध उपलब्धता कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े करती है। 
 
जब मुख्य सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही थीं और खुलेआम अवैध बिक्री हो रही थी, तो स्थानीय सीतारामडेरा थाना और उत्पाद विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? 
 
क्या यह अवैध कारोबार पुलिस की मिलीभगत से चल रहा था या प्रशासनिक उदासीनता के कारण तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं?