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फर्जी FB आईडी से ठगी के मामले में दारोगा की भूमिका संदिग्ध: पीड़िता बोलीं- आरोपी को बचाने के लिए दबाए डिजिटल साक्ष्य

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:44 PM (IST)

जमशेदपुर में फर्जी फेसबुक आईडी से 18 लाख की ठगी के मामले में नया मोड़ आया है, जहां पीड़िता ने ...और पढ़ें

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।(AI Generated Image)

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।(AI Generated Image)

HighLights

  1. फर्जी फेसबुक आईडी से आदिवासी महिला से 18 लाख रुपये की ठगी।

  2. पीड़िता ने जांच अधिकारी पर डिजिटल साक्ष्य गायब करने का आरोप लगाया।

  3. एसएसपी से मिलकर निष्पक्ष जांच और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग।

जासं, जमशेदपुर। जमशेदपुर के कदमा की रहने वाली एक आदिवासी महिला से फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर 18 लाख रुपये की साइबर ठगी किए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। 

पीड़िता ने मामले के जांच अधिकारी (IO) सह सोनारी थाना के अवर निरीक्षक (एसआई) शिवम राज पर आरोपी को लाभ पहुंचाने और जमानत दिलाने की नीयत से केस डायरी से डिजिटल साक्ष्य गायब करने का संगीन आरोप लगाया है।


न्याय की मांग को लेकर पीड़िता ने बुधवार को वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. एहतेशाम वकारिब से मुलाकात कर शिकायती आवेदन सौंपा। पीड़िता ने निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल जांच अधिकारी को बदलने और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है।

फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगे 18 लाख रुपये

कदमा के फार्म एरिया निवासी पीड़िता लक्ष्मी दलाई द्वारा एसएसपी को दिए गए आवेदन के अनुसार, सोनारी (नया लाइन) निवासी अरुण कुमार (पिता- अशोक कुमार) ने फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उससे संपर्क साधा। 
 
फिर झांसे में लेकर 18 लाख रुपये ठग लिए। जब पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने उसके साथ जातिसूचक गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकियां दीं। 
 
इस संबंध में बिरसानगर थाने में 13 जुलाई को एससी-एसटी (SC-ST) अत्याचार निवारण अधिनियम और ठगी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
 

60 दिन बीतने पर भी गिरफ्तारी नहीं

पीड़िता का आरोप है कि मामला दर्ज हुए 60 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच अधिकारी एसआई शिवम राज ने आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया और न ही अदालत में चार्जशीट दाखिल की। 

पीड़िता का दावा है कि उसने गाली-गलौज और डिजिटल बातचीत के पुख्ता प्रमाण (ऑडियो व चैट) पेन ड्राइव में पुलिस को सौंपे थे। 
 
आरोप है कि जांच अधिकारी ने आरोपी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से 25 अगस्त 2026 की केस डायरी में इन महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को दर्ज ही नहीं किया।
 

गवाहों के बयान पर टालमटोल

शिकायत के मुताबिक, मामले की दो प्रमुख गवाहों (जे. गीता और सुमित्रा सिन्हा) के बयान डीएसपी (हेडक्वार्टर-2) के कार्यालय में दर्ज कराए जा चुके हैं। 
 
इसके बावजूद जांच अधिकारी केस डायरी में बयान दर्ज करने में आनाकानी करते रहे, जिसे बाद में स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा गया। 

पीड़िता ने एसएसपी से मामले का संज्ञान लेते हुए केस डायरी में पेन ड्राइव के साक्ष्य दर्ज कराने और दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है।