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विश्व आदिवासी दिवस 2026: गोपाल मैदान में महाजुटान आज, जानिए कोल्हान की दो महान शख्सियतों का प्रेरक सफर

By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
Published: Sun, 09 Aug 2026 07:00 AM (IST)

विश्व आदिवासी दिवस 2026 के अवसर पर जमशेदपुर के गोपाल मैदान में 'अपनी पहचान को पहचानें' थीम पर भव्य जनसभा और सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई।

संताली संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाले रवि राज मुर्मू और ओलचिकी लिपि के अग्रदूत रबिन्द्र नाथ मुर्मू जैसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को याद किया गया।

संताली संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाले रवि राज मुर्मू और ओलचिकी लिपि के अग्रदूत रबिन्द्र नाथ मुर्मू जैसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को याद किया गया।

HighLights

  1. गोपाल मैदान में विश्व आदिवासी दिवस 2026 का भव्य आयोजन।

  2. रवि राज मुर्मू ने संताली सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई।

  3. रबिन्द्र नाथ मुर्मू संताली भाषा, ओलचिकी लिपि के अग्रदूत।

जासं, जमशेदपुर। विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त 2026) के अवसर पर पूरे जिले में जबरदस्त उत्साह है। जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आज भव्य जनसभा और सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। 
 
इस वर्ष कार्यक्रम की मुख्य थीम 'अपनी पहचान को पहचानें' रखी गई है। आयोजन को सफल बनाने में महिला नेतृत्वकर्ताओं पार्वती हांसदा, सरिता हांसदा, बबीता सोरेन, सुजाता मुर्मू और सालगे हांसदा सहित अन्य की विशेष भूमिका है। 
 
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मुख्य संयोजक इदार हेंब्रम और अध्यक्ष हेमंद्र हांसदा ने सभी से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। विश्व आदिवासी दिवस के इस अवसर पर जमशेदपुर और कोल्हान की माटी से जुड़ी दो प्रमुख शख्सियतों का संघर्ष और योगदान सभी के लिए प्रेरणादायी है:
 

1. रवि राज मुर्मू : सिनेमा के जरिए संताली संस्कृति को वैश्विक पहचान

जादूगोड़ा के कुमिरमुड़ी गांव निवासी युवा फिल्मकार रवि राज मुर्मू ने अपनी भाषा और लोककथाओं को पर्दे पर उतारा है।
 
करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से मास कम्यूनिकेशन के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से फिल्म एडिटिंग में पीजीडीएम किया। 
 
सावंता स्टूडियोज एलएलपी के संस्थापक रवि ने 'इञक् उमूल' और 'आंगेन' जैसी प्रशंसित संताली लघु फिल्में बनाई हैं। वर्तमान में उनकी संताली फीचर फिल्म 'सुंडी: द रॉबिनहुड ऑफ संताल' पर काम चल रहा है। 
 
उन्होंने नेटफ्लिक्स की 'ट्रायल बाय फायर' और हॉटस्टार की 'ह्यूमन' जैसी राष्ट्रीय वेब सीरीज में भी संपादन किया है।
 

2. रबिन्द्र नाथ मुर्मू: संताली भाषा व ओलचिकी के अग्रदूत

वर्ष 1987 में आजसू से जुड़कर झारखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले रबिन्द्र नाथ मुर्मू का नाम गृह विभाग की सेनानी सूची में दर्ज है। 
 
आंदोलन के बाद उन्होंने टाटा स्टील में मजदूर के रूप में काम करते हुए पढ़ाई जारी रखी और संताली, विधि तथा मास कम्यूनिकेशन में स्नातकोत्तर किया। 
 
ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन के महासचिव के रूप में वे पिछले 12 वर्षों से टाटा स्टील फाउंडेशन के ट्राइबल लिटरेसी कार्यक्रम के तहत 200 से अधिक केंद्रों में ओलचिकी और संताली का प्रसार कर रहे हैं। 
 
इस अभियान से अब तक झारखंड, ओडिशा, बंगाल और असम के 1.5 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं।
 

ईचागढ़में 'झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026' की पूर्व संध्या पर बैठक

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झारखंड सरकार के निर्देशानुसार उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुरूकतोपा में 'झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026' की पूर्व संध्या पर विशेष तैयारी बैठक आयोजित की गई। 
 
प्रधानाचार्य संजय महतो और ग्राम प्रधान शंकर मांझी की मौजूदगी में विद्यालय के बच्चों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान पहनकर अपनी समृद्ध कला-संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। 
 
शिक्षकों ने कहा कि यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और सामाजिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।