जमशेदपुर बना 'सट्टा सिटी': साकची से टेल्को तक हर आधे घंटे में लग रही करोड़ों की चपत, ऐप के मायाजाल में फंसे युवा
जमशेदपुर 'सट्टा सिटी' में तब्दील हो रहा है, जहां साकची, गोलमुरी जैसे इलाकों में ऑनलाइन सट्टे का खतरनाक सिंडिकेट सक्रिय है।

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HighLights
गुप्त APK फाइलों से नेटवर्क, दिहाड़ी मजदूरों को कर्ज में धकेल रहा।
पुलिस की मिलीभगत के आरोप, मासिक वसूली से चल रहा धंधा।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। स्टील सिटी के रूप में विख्यात जमशेदपुर की पहचान अब धीरे-धीरे 'सट्टा सिटी' में तब्दील होती जा रही है। पुलिस की नाक के नीचे साकची, गोलमुरी, मानगो, बिष्टुपुर और जुगसलाई में ऑनलाइन सट्टे का खतरनाक सिंडिकेट सक्रिय हो चुका है।
ड्रग्स से भी घातक मानी जा रही इस लत ने शहर के दिहाड़ी मजदूरों, सब्जी विक्रेताओं और रेहड़ी-पटरी वालों को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है।
यहां से निकलने का रास्ता सिर्फ और सिर्फ अपराध की गलियों से होकर गुजरता है। आलम यह है कि शहर के प्रमुख बाजारों में सरेआम दांव लग रहे हैं, और पुलिस मैनेजमेंट के खेल में मौन साधे बैठी है।
एपीके (APK) फाइल से मोबाइल बना मिनी कैसिनो
इस अवैध बाजार में इन दिनों राजश्री ऑनलाइन, डायमंड सट्टा, लकी स्टार और गोल्डन अंक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का एकछत्र वर्चस्व स्थापित है।
सट्टेबाजों का यह पूरा नेटवर्क किसी बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कंपनी की तरह हाईटेक तरीके से संचालित हो रहा है।
तकनीकी निगरानी से बचने के लिए ये गिरोह अपने ऐप को सीधे गूगल प्ले स्टोर पर डालने के बजाय व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) समूहों के जरिए गुप्त लिंक (APK फाइल) के रूप में फैलाते हैं।
यह फाइलें इतनी सुरक्षित कोडिंग से बनाई जाती हैं कि ये एंटीवायरस और सरकारी सर्वर की पकड़ में आसानी से नहीं आतीं।
जैसे ही कोई यूजर इस ऐप को डाउनलोड करता है, उसे गिरोह के एजेंट द्वारा एक यूनिक आईडी और पासवर्ड दिया जाता है।
ऐप के भीतर एक से नौ तक के अंकों पर दांव लगाने की पूरी व्यवस्था होती है, जिसे सट्टेबाजी की तकनीकी भाषा में सिंगल कहा जाता है।
चौकाने वाली बात यह है कि इस खेल में हर आधे घंटे में परिणाम घोषित किए जाते हैं, जिसे एक केंद्रीय वेबसाइट के पैनल चार्ट पर तुरंत अपडेट किया जाता है। हर आधे घंटे में परिणाम आने के कारण लोगों में बार-बार दांव लगाने की सनक पैदा हो रही है।
कमीशन का गणित और एजेंटों की चांदी
इस काले सिंडिकेट में कमाई का पिरामिड बेहद गहरा और लुभावना है। सट्टेबाजी का मुख्य संचालक (बुकी) स्थानीय स्तर पर नेटवर्क बढ़ाने के लिए छोटे एजेंटों को 5 से 10 प्रतिशत तक का भारी भरकम कमीशन देता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि साकची या जुगसलाई का कोई छोटा एजेंट एक दिन में एक लाख रुपये की बुकिंग लेता है, तो उसे बिना किसी आर्थिक जोखिम के 10 हजार रुपये तक की सीधी और सुरक्षित कमाई होती है।
इतना ही नहीं, सिंडिकेट का लालच यहीं खत्म नहीं होता। जो ग्राहक एक का दस पाने के लालच में अपना पैसा हारते हैं, उस लॉस अमाउंट (Loss Amount) पर भी इन एजेंटों को ऊपर से अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाता है।
यही भारी कमीशन रेहड़ी पटरी वालों, बेरोजगार युवाओं और छोटे दुकानदारों को एजेंट बनने के लिए उकसा रहा है। नतीजतन, यह अवैध धंधा अब मुख्य बाजारों से निकलकर गली मोहल्लों की राशन और पान की दुकानों तक पहुंच गया है।
पुलिस और साइबर सेल से बचने के लिए भुगतान पूरी तरह से डिजिटल वॉलेट और क्यूआर कोड के जरिए होता है, जिनके लिंक फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए सिम कार्डों से जुड़े होते हैं।
थानों की 'मंथली रेट लिस्ट' और खाकी का मौन
साकची की मछली लाइन और जलेबी लाइन से लेकर मानगो पुल, परसुडीह और टेल्को तक, यह नेटवर्क घर-घर में तबाही मचा रहा है। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि इस पूरे काले कारोबार को स्थानीय पुलिस का सीधा अभयदान प्राप्त है।
शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बिना किसी बाधा के सट्टा संचालित करने के लिए बकायदा मंथलीरेट फिक्स है। बाजार में चल रही चर्चाओं के अनुसार, साकची थाना क्षेत्र में इस धंधे को चलाने के एवज में 50 हजार से एक लाख रुपये, जबकि परसुडीह, गोलमुरी और जुगसलाई जैसे घने इलाकों में सवा लाख रुपये तक की अवैध मासिक वसूली की जाती है।
यही कारण है कि पुलिस की पीसीआर और गश्ती गाड़ियां इन सट्टा अड्डों के ठीक बगल से गुजर जाती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति या फाइलों में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर इतिश्री कर ली जाती है।
टेल्को और गोलमुरी के चावल बाजारों में तो सट्टेबाज इतने बेखौफ हैं कि वे खुलेआम घूमकर एजेंटों से वसूली और विजेताओं को भुगतान कर रहे हैं।
कर्ज की फांस और अपराध की ओर बढ़ते कदम
सट्टे की इस अनियंत्रित लत ने शहर के निम्न और मध्यम आय वर्ग को पूरी तरह से आर्थिक और सामाजिक रूप से तबाह कर दिया है। मानगो के रहने वाले एक पीड़ित रमेश (बदला हुआ नाम) ने अपनी आपबीती सुनाई।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में मैंने सिर्फ दो हजार रुपये जीते थे, जिससे मेरा लालच बढ़ गया। उसके बाद जीतने की चाहत और फिर हारे हुए पैसे को वसूलने के चक्कर में अब तक मैं तीन लाख रुपये से अधिक हार चुका हूं।
आज स्थिति यह है कि कर्जदारों के डर से मुझे छिपकर रहना पड़ रहा है और घर का चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है।
इस गंभीर मुद्दे पर मनोवैज्ञानिक डॉ. युगल किशोर का कहना है कि यह डिजिटल सट्टेबाजी किसी सिंथेटिक या केमिकल ड्रग्स के एडिक्शन से कम नहीं है।
व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई हार जाता है
यह सीधे इंसान के डोपामाइन स्तर को प्रभावित करती है। जब कोई व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई हार जाता है, तो उसकी भरपाई करने के उन्माद में वह चोरी, छिनतई, राहजनी और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने लगता है।
आंकड़े गवाह हैं कि सट्टेबाजों को इस पूरे खेल में मोटा मुनाफा मिलता है, जबकि दांव लगाने वाला 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में अपनी पूरी जमा पूंजी और सामाजिक प्रतिष्ठा दोनों गंवा बैठता है।
यदि समय रहते जमशेदपुर जिला प्रशासन और साइबर सेल ने इस डिजिटल कैंसर पर कड़ा प्रहार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में शहर की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती है।
