सरकारी कर्मी घोषित करने की मांग को ले आंगनबाड़ी सेविकाओं ने किया प्रदर्शन
जमशेदपुर में आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकारी कर्मचारी का दर्जा ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मुख्य मांग।
मानदेय वृद्धि और डिजिटल सुविधाओं का अभाव।
सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन/ग्रेच्युटी की व्यवस्था नहीं।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । पूर्वी सिंहभूम जिले की आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर बुधवार को जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। शहर के मुख्य मार्गों से रैली निकालते हुए बड़ी संख्या में महिलाएं उपायुक्त (DC) कार्यालय पहुंचीं, जहां यह रैली एक विशाल विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गई।
प्रदर्शनकारियों ने झारखंड सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ज्ञापन सौंपा। आंदोलन का नेतृत्व कर रही आंगनबाड़ी सेविकाओं का कहना है कि वे वर्ष 1975 से समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य और पोषण की सेवाएं पहुंचा रही हैं।
इसके बावजूद, दशकों बीत जाने के बाद भी उन्हें 'सरकारी कर्मचारी' घोषित नहीं किया गया है। सेविकाओं का आरोप है कि सरकार उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है, जिससे उनके भीतर गहरा असंतोष व्याप्त है।
मानदेय और महंगाई का असंतुलन
झारखंड आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष पुष्पा महतो ने बताया कि पूर्व के आंदोलनों के बाद मानदेय बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया था। लेकिन मौजूदा महंगाई के दौर में यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
सेविकाओं ने तर्क दिया कि उनसे काम तो सरकारी कर्मचारियों की तरह लिया जाता है, लेकिन भुगतान के वक्त उन्हें 'स्वयंसेवक' की श्रेणी में रख दिया जाता है।
डिजिटल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का अभाव
प्रदर्शन के दौरान सेविकाओं ने सरकार की वादाखिलाफी पर भी सवाल उठाए। उनकी शिकायतें है कि सरकार ने योजनाओं के डेटा अपडेट के लिए 5G मोबाइल देने की बात कही थी, जो अब तक धरातल पर नहीं उतरी है।
तकनीक के अभाव में उन्हें रिपोर्टिंग करने में भारी कठिनाई होती है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए मिलने वाले खाद्य पदार्थों की बाजार कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन सरकार द्वारा आवंटित राशि पुरानी दरों पर ही आधारित है।
सेवानिवृत्ति के बाद जीवनयापन के लिए पेंशन या ग्रेच्युटी जैसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से कर्मियों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है।
