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जमशेदपुर में मौत के मुंह से बच निकला 2 साल का बच्‍चा; जानकर रह जाएंगे दंग

Published: Sun, 14 Jun 2026 12:22 AM (GMT+05:30)

जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक चमत्कार कर दिखाया, जहां दो साल का मासूम सोहन जहरीले ...और पढ़ें

एमजीएम अस्‍पताल में भर्ती मासूम को देखने पहुंचे लोग।

एमजीएम अस्‍पताल में भर्ती मासूम को देखने पहुंचे लोग।

HighLights

  1. एमजीएम अस्पताल में 50 वायल ASV दिए गए।

  2. डॉक्टरों की टीम ने बच्चे की जान बचाई।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। क्या कोई दो साल का मासूम बच्चा साक्षात यमराज को चकमा देकर वापस लौट सकता है? सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी या चमत्कार जैसा लगता है, लेकिन जमशेदपुर के एमजीएम (MGM) अस्पताल में डॉक्टरों ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। 
 
घाटशिला के एक छोटे से बच्चे ने जहरीले सांप के डसने के बाद मौत को इतनी करीब से मात दी है कि डॉक्टर से लेकर राजनेता तक, जो भी सुन रहा है वो दंग रह जा रहा है।
 
पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला (बुरूडीह) निवासी सनत मुर्मू के दो वर्षीय पुत्र सोहन मुर्मू की जान एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों की अभूतपूर्व तत्परता और रात-दिन की मेहनत से बच गई है। तीन दिन पहले मासूम सोहन को एक बेहद जहरीले सांप ने काट लिया था, जिसके बाद सांप का जहर उसके पूरे शरीर में फैल गया और उसकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई थी।
 

घाटशिला से एमजीएम अस्पताल किया गया था रेफर

स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया। जब बच्चे को अस्पताल लाया गया, तब वह लगभग बेसुध था। डॉक्टरों ने बिना एक पल गंवाए उसकी गंभीर स्थिति को भांपा और उसे तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया।
 

चुनौतीपूर्ण था इलाज: देने पड़े एंटी स्नेक वेनम के 50 वायल

एमजीएम अस्पताल के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. केके चौधरी ने इस बेहद पेचीदा और चुनौतीपूर्ण केस के बारे में बताते हुए कहा कि बच्चे के शरीर में जहर की मात्रा काफी ज्यादा थी। उसे मौत के मुंह से खींचकर वापस लाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने लगातार लगभग 50 वायल एंटी स्नेक वेनम (Anti Snake Venom) के इंजेक्शन दिए। 
 
आमतौर पर बच्चों को इतनी बड़ी मात्रा में डोज देना जोखिम भरा होता है, लेकिन डॉक्टरों की सटीक निगरानी काम आई। लगातार तीन दिनों तक आईसीयू में चले गहन उपचार, वेंटिलेशन सपोर्ट और डॉक्टरों की चौबीसों घंटे की निगरानी के बाद आखिरकार सोहन के शरीर ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। 
 
शनिवार को वह पूरी तरह होश में आ गया और मुस्कुराने लगा। डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह फिट घोषित करते हुए शनिवार को अस्पताल से छुट्टी (Discharge) दे दी है।
 

इन जांबाज डॉक्टरों की टीम ने बचाया जीवन

डॉ. केके चौधरी के कुशल नेतृत्व में इस जीवनदायिनी टीम में डॉ. राघवेंद्र, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. तारा, डॉ. रूफीना, डॉ. स्नेहा खत्री, डॉ. अमाल, डॉ. शैल और डॉ. राखी शामिल थीं, जिन्होंने इस चमत्कार को अंजाम दिया।

मासूम सोहन के ठीक होने की खबर मिलते ही शनिवार को झामुमो (JMM) नेता विक्टर सोरेन और फतेहचंद टुडू सहित कई अन्य गणमान्य लोग एमजीएम अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चे और उसके माता-पिता से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना। साथ ही, डॉक्टरों की इस बेहतरीन सफलता और उनके मानवीय प्रयासों की जमकर सराहना की।

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