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प्राइवेट पार्ट की थैली थी खाली; पेट में बन गया 1KG का ट्यूमर, 20 साल बाद जमशेदपुर में सर्जरी से बची जान

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:33 PM (IST)

सरायकेला-खरसावां के एक 21 वर्षीय युवक के पेट से एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर में डॉक्टरों ने करीब एक किलोग्राम का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला।

एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों की सूझबूझ और सफल सर्जरी से निकाला गया ट्यूमर।

एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों की सूझबूझ और सफल सर्जरी से निकाला गया ट्यूमर।

HighLights

  1. एमजीएम जमशेदपुर में 21 वर्षीय युवक के पेट से 1 किलो ट्यूमर निकला।

  2. जन्म से अंडकोष न उतरने के कारण 20 साल में ट्यूमर बना।

  3. डॉक्टरों ने नवजात में अंडकोष जांच की अहमियत पर जोर दिया।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सरायकेला-खरसावां निवासी एक 21 वर्षीय युवक के पेट में पिछले कई वर्षों से पल रहा करीब एक किलोग्राम का ट्यूमर आखिरकार एमजीएम (MGM) अस्पताल के डॉक्टरों की सूझबूझ और सफल सर्जरी से निकाल दिया गया।

चिकित्सकों के अनुसार, युवक के जन्म के समय से ही उसकी दाहिनी अंडकोष की थैली में अंडकोष मौजूद नहीं था। जन्म के समय न तो उसके परिवार का ध्यान इस ओर गया और न ही बड़ा होने पर युवक ने इसे गंभीरता से लिया। 
 

20 सालों तक नजरअंदाज होती रही समस्या 

करीब 20 वर्षों तक यह गंभीर स्थिति नजरअंदाज होती रही। लगभग चार साल पहले युवक को पेट में दर्द के साथ अंदर कोई गोला जैसा महसूस होने लगा। 
 
जब परेशानी काफी बढ़ गई, तब परिजनों ने इसे गंभीरता से लिया और करीब दो सप्ताह पहले उसे इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया।
 

जांच में कैंसर के लक्षण और ट्यूमर का खुलासा

अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि युवक की दाहिनी अंडकोष की थैली खाली है और पेट के अंदर काफी बड़ा ट्यूमर विकसित हो चुका है। आगे की विस्तृत जांच में इस ट्यूमर में कैंसर के लक्षण भी पाए गए।

सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एचआर खान के नेतृत्व में डॉ. एसपी गुप्ता और उनकी मेडिकल टीम ने मंगलवार को एक अत्यंत जटिल ऑपरेशन कर पेट के अंदर मौजूद करीब एक किलो के ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। फिलहाल युवक की स्थिति में सुधार है।

नवजात के जन्म के समय दोनों अंडकोष स्‍वतर: थैली में आ जाते हैं

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सामान्यतः नवजात शिशु के जन्म के समय दोनों अंडकोष अपने आप थैली में आ जाते हैं। हालांकि, कुछ बच्चों में ये नीचे उतरने के बजाय पेट या शरीर के ऊपरी हिस्से में ही अटक जाते हैं। 
 
इसे अनदेखा करना भविष्य में जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि लंबे समय तक अंडकोष के थैली में न आने पर उसमें ट्यूमर और कैंसर बनने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।
 

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद जरूर करें यह जांच

डॉ. एसपी गुप्ता ने सभी अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद यह जांच जरूर करें कि दोनों अंडकोष अपनी जगह पर हैं या नहीं। 
 
यदि कोई अनिमियतता दिखे, तो बिना देरी किए तत्काल शिशु रोग विशेषज्ञ या सर्जन से परामर्श लें। समय रहते पहचान होने से ऐसी जटिलताओं से आसानी से बचा जा सकता है।