जमशेदपुर, जागरण संवाददाता।  आप हज यात्रा पर जा रहे हैं तो आपके लिए यह जरूरी खबर है। हज यात्री अपने साथ पांच किलोग्राम से अधिक का जमजम कैन नहीं ला सकेंगे। सऊदी अरब की सरकार ने एलान किया है कि वापसी में पाक आब (पानी)-ए-जमजम लाने के लिए वही कैन इस्तेमाल की जा सकेगी जो सऊदी सरकार हज यात्रियों को देगी। पहले आजमीन-ए-हज 10-15 लीटर आब-ए-जमजम ला सकते थे। लेकिन, अब सरकार ने बसों और फ्लाइट में सामान का बोझ कम करने की वजह से ऐसा किया है। 

क्या है आब-ए-जमजम 

आब-ए-जमजम मुसलमानों के बीच पाक पानी माना जाता है। इसका बड़ा एहतेराम है। किसी भी बीमारी में ये पानी शिफा देता है। यानी इस पानी को पीने से बीमारी दूर हो जाती है। पानी से घरों में बरकत भी होती है। 

हजरत इस्माइल के एडिय़ां रगडऩे से निकला था जमजम

हजरत इब्राहिम अ. की बीवी हजरत हाजरा अ. जब मक्का की वादियों में थीं तो उनके बेटे हजरत इस्माइल को प्यास लगी। इस पर वो रोने लगे। मां हजरत हाजरा पानी की तलाश में सफा और मरवा पहाडिय़ों की बीच दौड़ रही थीं। तभी हजरत इस्माइल ने एडिय़ां रगड़ीं और पानी का चश्मा फूट पड़ा। यही पानी जमजम कहा जाता है। 

कीताडीह में हुई हज की ट्रेनिंग 

कीताडीह की मस्जिद में हज की ट्रेनिंग हुई। यहां मदरसा फैजुल उलूम से फार्म भरने वाले लोगों ने हज की ट्रेनिंग ली। आजमीन-ए-हज को हज करने के तरीके बताए गए। उन्हें अहराम बांधने का तरीका भी बताया गया। जमशेदपुर से 306 आजमीन-ए-हज इस बार रवाना होंगे। इन आजमीन ने साकची जामा मस्जिद और मदरसा फैजुल उलूम से हज का आवेदन किया था। ये आजमीन पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला खरसावां के कपाली के रहने वाले हैं। 

Posted By: Rakesh Ranjan

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