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एनएच चौड़ीकरण की भेंट चढ़ा जामडीह मध्य विद्यालय, 5 वर्षों से कला भवन में पढ़ने को मजबूर 128 मासूम

By Dilip KumarEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Sat, 12 Sep 2026 04:03 PM (IST)

सरायकेला-खरसावां के नीमडीह प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय जामडीह का भवन NH चौड़ीकरण में टूटने के बाद 5 साल से 128 बच्चे कला भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।

मूलभूत सुविधाओं के अभाव और विभाग की उदासीनता से ग्रामीण आक्रोशित हैं।

मूलभूत सुविधाओं के अभाव और विभाग की उदासीनता से ग्रामीण आक्रोशित हैं।

HighLights

  1. NH चौड़ीकरण में टूटा जामडीह स्कूल भवन, 5 साल से अस्थायी।

  2. 128 बच्चे कला भवन में मूलभूत सुविधाओं के बिना पढ़ रहे।

  3. ग्रामीण DC-DEO से नए भवन निर्माण की तत्काल मांग कर रहे।

संवाद सहयोगी, नीमडीह। सरकार भले ही प्रदेश में बेहतर शिक्षा और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल का दावा करे, लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत जामडीह गांव से सामने आई तस्वीर इन दावों की पोल खोलती दिख रही है। 
 
यहां उत्क्रमित मध्य विद्यालय जामडीह पिछले पांच वर्षों से अपने भवन के बजाय एक कला भवन में सिमट कर रह गया है। 
 
ग्रामीणों के अनुसार, करीब पांच वर्ष पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के चौड़ीकरण के दौरान विद्यालय के मूल भवन को तोड़ दिया गया था। 
 
उस समय पठन-पाठन बाधित न हो, इसके लिए बच्चों को गांव के कला भवन में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया था। तब इसे महज कुछ दिनों की वैकल्पिक व्यवस्था माना जा रहा था। 
 
लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी नया भवन नहीं बन सका और यह अस्थायी व्यवस्था छात्रों के लिए स्थायी मजबूरी बन गई है।
 
वर्तमान में इस विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक कुल 128 बच्चे नामांकित हैं। कला भवन में पर्याप्त कमरों का अभाव है, जिसके कारण सभी कक्षाओं का संचालन सही ढंग से नहीं हो पाता। 
 
इसके अलावा स्कूल में शौचालय और सुरक्षित पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब पानी कमरों तक घुस आता है। 
 
ऐसे में बच्चों को नमी और सीलन भरे कमरों में बैठकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
 
विभाग की उदासीनता पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि नए विद्यालय भवन के निर्माण के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है और बजट भी स्वीकृत बताया जा रहा है। 
 
इसके बावजूद पिछले चार वर्षों से निर्माण कार्य केवल कागजी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक फाइलों तक ही सीमित है।
स्थानीय निवासियों ने सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त (DC) एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। 
 
ग्रामीणों का कहना है कि 128 बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बंद कर विभाग अविलंब नए भवन का निर्माण कार्य शुरू कराए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल मिल सके।