जमशेदपुर [जागरण स्पेशल]। लौहनगरी की लाइफस्टाइल तेजी से हेल्थ कांशियस हो रही है। साफ-सफाई का तो खास ख्याल रखा ही जा रहा, खाने-पानी में भी हाइजीन का पूरा ध्यान दिया जा रहा है। लोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही चीजों से खुद को दूर कर रहे हैं। ऐसी ही दूरी इन दिनों शहर के अधिकतर लोग प्लास्टिक की बोतलों से बना रहे हैं। अब प्लास्टिक की बोतलों को कॉपर के बोतल रिप्लेस कर रहे हैं। कॉपर बोतल साथ रखने का फैशन भी चल पड़ा है।

महंगे होने के बावजूद लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। कॉपर बोतलों में भी जयपुर क्राफ्ट की डिजाइन वाली कॉपर बोतलें चलन में है। इनका डिजाइन और कारीगरी लोगों को खासी आकर्षित कर रही है।

प्लास्टिक घुलकर चला जाता पेट में

बात चाहे घर की हो या फिर ऑफिस की। लोग प्लास्टिक की बोतलों में पानी रखने व पीने से अब परहेज करने लगे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि प्लास्टिक की बोतल में लगातार पानी पीना स्वास्थ्य के लिए काफी घातक साबित होता है। इससे कैंसर तक हो सकता है। हालांकि, नए प्लास्टिक के बोतलों से पानी पीने में बहुत खतरा नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक एक ही प्लास्टिक बोतल से पानी पीना खतरनाक है। इससे प्लास्टिक बोतल के प्लास्टिक पार्टिकल पानी में घुलकर आपके शरीर के अंदर चले जाते हैं।

 कॉपर बोतल दिखने में भी क्लास के

कॉपर के पानी बोतल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ ही दिखने में भी क्लास के होते हैं। इनकी सैकड़ों डिजाइन उपलब्ध होती हैं। इसलिए भी इसे पसंद किया जा रहा।

300 से दो हजार रुपये तक है कीमत

कॉपर के बोतल हैंड मेड भी मिलते हैं तो मशीन मेड भी। इनकी कीमत तीन सौ रुपये से शुरू होकर दो हजार रुपये तक जाती है। मॉडल व डिजाइन के अनुरूप इनकी कीमत होती है।

डिजाइन वाले कॉपर बोतल डिमांड में

शहर में इन दिनों जयपुर क्राफ्ट वाले कॉपर बोतल डिमांड में हैं। इनमें राजस्थान की कलाकृतियां उकेरी हुई होकी हैं, जो बोतल को आकर्षक बनाती हैं। डिजाइन होने के कारण यह जल्दी गंदा भी नहीं होता।

कोल्ड ड्रिंक की बोतल में पानी रखना भी खतरनाक

कोल्ड ड्रिंक की बोतल में पानी रखने से हार्ट डिजीज, पैदा हुए बच्चे को खतरा, गर्भवती महिला को खतरा, पेट की दिक्कतें आदि ऐसी ही कई बीमारिया हो सकती हैं। चूंकि, प्लास्टिक की बोतलों में बीपीए (बिसफेनोल) ए नामक एक रसायन भी पाया जाता है, जिसका सेहत पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्लास्टिक गर्म होने पर बढ़ जाता खतरा

ज्यादा तापमान होने पर या पानी के गरम होते ही प्लास्टिक बोतल में से कई खतरनाक हानिकारक तत्व निकलते हैं जो पानी के साथ पेट में पहुंच जाते हैं और फिर शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।

कॉपर बोटल कई मायने में लाभदायक

ताबे को प्रकृति में ओलीगोडिनेमिक के रूप में (बैक्टीरिया पर धातुओं की स्टरलाइज प्रभाव) जाना जाता है और इसमें रखे पानी के सेवन से बैक्टीरिया को आसानी से नष्ट किया जा सकता है। ताबा आम जल जनित रोग जैसे डायरिया, दस्त और पीलिया को रोकने में मददगार माना जाता है।

थर्मोस्टील बोतल भी बने विकल्प

सेहत ठीक रखने के लिए लोग थर्मेस्टील की बोतलों को भी विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे। इन बोतलों में पानी गर्म है तो गर्म ही रहती है और अगर ठंडी है तो दो से तीन घंटे ठंडी ही बनी रहती है। इसका पानी भी प्लास्टिक की बोतल के पानी से कई गुना साफ होता है।

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