मेरे दोस्त दिवाकर तिवारी ने फिल्म 'पंचलैट' में काम किया है। इसलिए मैं इस फिल्म को देखने आया हूं। लाजवाब फिल्म है।

- राम सिंह, प्रेमनगर, टेल्को।

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मैं बोकारो में रहता हूं। जमशेदपुर अपने रिश्तेदार के यहां आया हूं। दैनिक जागरण अखबार पढ़ा तो पता चला कि फिल्म फेस्टिवल चल रहा है।

- गौरव कुमार, टेल्को।

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काफी अधिक भीड़ है। सीटें फुल हैं। फिर भी मैं खड़ा होकर फिल्म देखा। काफी अच्छी फिल्म है। ऐसे प्रयासों से सिनेमा सार्थक होता है।

- प्रमोद कुमार, बागबेड़ा।

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फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने के लिए दैनिक जागरण को धन्यवाद। फिल्म तो दिखाया ही जा रहा है साथ ही उससे संबंधित सवाल-जवाब भी करने का मौका मिल रहा है।

- कमलेश वर्मा, डिमना रोड।

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- दैनिक जागरण की यह काफी अच्छी पहल है। 'पंचलैट' देखकर मजा आ गया। यह फिल्म परिवार के साथ देखने लायक है। फिल्म कहीं भी बोर नहीं करती।

- कन्हैया रजक, मानगो।

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दैनिक जागरण शहर में हर साल फिल्म फेस्टिवल आयोजित कर फिल्म दिखाने के साथ-साथ नए प्रतिभाशाली युवाओं को मौका भी देने का काम कर रही है, जो की काफी सराहनीय है।

- विक्रम झा, सोनारी।

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सभी फिल्म की कहानी अच्छी है। फिल्म फेस्टिवल में आम लोगों को ऑफबीट फिल्में देखने व कलाकारों तथा निर्देशकों से मिलने का मौका मिल रहा है, यह बड़ी बात है।

- परविंदर कौर, मानगो।

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जागरण फिल्म फेस्टिवल सराहनीय कदम है। मैं दो दिन से लगातार फिल्म देखने आ रहा हूं। खास बात यह है कि सभी फिल्म हाउसफुल जा रही है।

- हरपाल सिंह, मानगो।

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फिल्म 'माचिस' देखने के लिए मैं अपने दोस्तों के संग आया हूं। पता चला कि खूब भीड़ हो रही है, इसलिए आधे घंटे पहले ही मैं आ गया हूं, ताकि सीट आसानी से मिल सके।

- अमरजीत शर्मा, साकची।

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दैनिक जागरण अखबार अपना सामाजिक दायित्व को पूरी ईमानदारी से निभा रहा है। एक अखबार ऐसा आयोजन कर सकता है, यह जानकर खुशी हुई।

- दिलीप तिवारी, बाराद्वारी।

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काफी अच्छा प्रयास है। इसे आगे भी जारी रखना चाहिए। फिल्म देखने के साथ-साथ एक्टर, डायरेक्टर से सीधे सवाल करने का भी मौका मिल रहा है। युवाओं को काफी कुछ सीखने को मिल रहा है।

- पंपल यादव, ग्वाला बस्ती, भुइयांडीह।

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By Jagran