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परमाणु ऊर्जा में बड़ा कदम: बार्क और एनपीसीआईएल विकसित कर रहे बीएसएमआर, उद्योगों को मिलेगी स्वच्छ ऊर्जा

Published: Tue, 27 Oct 2026 11:42 PM (IST)

भारत भारी उद्योगों को प्रदूषणमुक्त करने और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य हेतु छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (BSMR) पर काम कर रहा है।

बार्क और एनपीसीआईएल द्वारा विकसित ये रिएक्टर उद्योगों को सीधे स्वच्छ, विश्वसनीय और कार्बन-मुक्त ऊर्जा प्रदान करेंगे।

बार्क और एनपीसीआईएल द्वारा विकसित ये रिएक्टर उद्योगों को सीधे स्वच्छ, विश्वसनीय और कार्बन-मुक्त ऊर्जा प्रदान करेंगे।

HighLights

  1. भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य पर।

  2. बार्क-एनपीसीआईएल मिलकर स्वदेशी BSMR विकसित कर रहे हैं।

  3. BSMR उद्योगों को सीधे स्वच्छ, कार्बन-मुक्त बिजली देगा।

जासं, जमशेदपुर। देश के भारी उद्योगों को प्रदूषणमुक्त बनाने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत अब छोटी आणविक इकाइयों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। 
 
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने संयुक्त रूप से स्वदेशी भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) विकसित करने का बीड़ा उठाया है। 
 
एनपीसीआईएल के कॉर्पोरेट संचार प्रमुख उमेद यादव के अनुसार, यह नवाचार देश के इस्पात, एल्युमिनियम और सीमेंट जैसे बुनियादी उद्योगों के लिए गेम चेंजर साबित होगा।
 

कारखानों के मुहाने पर पैदा होगी स्वच्छ बिजली 

पारंपरिक 700 मेगावाट क्षमता वाले विशाल प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों (पीएचडब्ल्यूआर) को स्थापित करने में विशाल भूखंड, भारी पूंजी और लंबा समय लगता है। 
 
इसके विपरीत, फैक्ट्री-निर्मित बीएसएमआर और भारत स्मॉल रिएक्टर्स (बीएसआर) को बहुत कम जगह और न्यूनतम लागत पर तैयार किया जा सकता है। 
 
इन्हें सीधे औद्योगिक परिसरों के नजदीक स्थापित किया जाएगा, जिससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने की झंझट खत्म होगी और उद्योगों को बिना ग्रिड निर्भरता के 24 घंटे सुरक्षित, विश्वसनीय और शून्य-कार्बन ऊर्जा मिल सकेगी।
 

निजी क्षेत्र की पूंजी से कार्बन मुक्ति को गति 

सरकार ने भारी जीवाश्म ईंधन खपत वाले उद्योगों के डी-कार्बोनाइजेशन के लिए इस क्षेत्र में निजी निवेश के दरवाजे खोल दिए हैं। 
 
वर्ष 2047 तक नियोजित कुल 100 गीगावाट क्षमता में से लगभग 39 से 42 गीगावाट बिजली निजी कंपनियों और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की साझेदारी से तैयार की जाएगी। 
 

2047 तक एनपीसीआईएल का 54 गीगावाट योगदान 

टाटा, रिलायंस और अडानी जैसे दिग्गज उद्योग घराने इस आधुनिक तकनीक में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उमेद यादव ने स्पष्ट किया कि एनपीसीआईएल अकेले 53,508 मेगावाट (लगभग 54 गीगावाट) परमाणु ऊर्जा का योगदान देगा। 
 
वर्तमान में देश में 8,780 मेगावाट क्षमता वाले 24 रिएक्टर क्रियाशील हैं, जबकि 7,500 मेगावाट के नौ रिएक्टर निर्माणाधीन हैं। 
 
इसके अलावा 9,800 मेगावाट क्षमता के 14 रिएक्टर पूर्व-परियोजना चरण में हैं। वर्ष 2031-32 तक देश की परमाणु क्षमता 22 गीगावाट का आंकड़ा पार कर जाएगी। 
 
फ्लीट मोड के बड़े रिएक्टरों के साथ मिलकर ये छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर वर्ष 2070 के 'नेट-जीरो' कार्बन संकल्प को सिद्ध करने में मील का पत्थर साबित होंगे।