भारत बनेगा दुनिया की AI महाशक्ति: 18 हाइपरस्केल डाटा सेंटरों को निर्बाध बिजली और लिक्विड कूलिंग देने का Master Plan
भारत AI सर्वरों की अत्यधिक गर्मी और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2.8 गीगावाट का एकीकृत ऊर्जा ...और पढ़ें

एआई और सुपरकंप्यूटिंग की थर्मोडायनामिक चुनौती से निपटने के लिए अभेद्य ऊर्जा और कूलिंग तंत्र धरातल पर उतारा जा रहा है।
HighLights
2.8 गीगावाट का एकीकृत ऊर्जा और कूलिंग तंत्र विकसित।
लिक्विड इमर्शन कूलिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकें उपयोग में।
2032 तक 26.3 गीगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग।
जासं, जमशेदपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का डिजिटल दिमाग यानी हजारों शक्तिशाली ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) जब खरबों जटिल गणनाएं एक साथ करते हैं, तो सर्वर चिप्स भट्टी की तरह तपने लगते हैं।
यदि mili second के लिए भी बिजली में रुकावट आए या कूलिंग का सिस्टम थम जाए, तो समूचा न्यूरल नेटवर्क क्रैश हो सकता है।
एआई और सुपरकंप्यूटिंग की इसी वैज्ञानिक व थर्मोडायनामिक चुनौती से निपटने के लिए देश में 2.8 गीगावाट (2800 मेगावाट) से अधिक क्षमता का अभेद्य ऊर्जा और कूलिंग तंत्र धरातल पर उतारा जा रहा है।
देश-दुनिया के 18 ब्लू-चिप हाइपरस्केल डाटा सेंटरों के सर्वर रूम को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए यह एकीकृत पहल शुरू की गई है।
चिपसेट की तपिश और आधुनिक कूलिंग तंत्र
पारंपरिक कंप्यूटर और सर्वर केवल पंखों की हवा (एयर कूलिंग) से ठंडे हो जाते हैं, लेकिन डीप लर्निंग और एआई सर्वरों में बिजली की प्रचंड खपत के कारण अत्यधिक ऊष्मा (थर्मल हीट) पैदा होती है।
इसके वैज्ञानिक समाधान के लिए अब पारंपरिक कूलिंग के बजाय डायरेक्ट-टू-चिप और 'लिक्विड इमर्शन कूलिंग' जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।
इसमें सर्वर चिप्स के सीधे संपर्क में विशेष शीतलक तरल (कूलेंट) प्रवाहित कर तापमान को नियंत्रित रखा जाता है। इस पूरी व्यवस्था के लिए एक पावर्ड लैंड (ऊर्जा युक्त विशेष भूमि) का मॉडल तैयार किया गया है, जहां हाई-वोल्टेज ग्रिड, लिक्विड कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) एक ही जगह उपलब्ध होंगे।
यह परियोजना केवल बिजली की सप्लाई तक सीमित न रहकर एक संपूर्ण तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) तैयार कर रही है। इसके तहत वर्तमान में 29 सक्रिय प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है।
इस 2.8 गीगावाट की कुल पाइपलाइन में लगभग 430 मेगावाट भार सीधे वितरण नेटवर्क से, 1,236 मेगावाट ट्रांसमिशन आधारित कनेक्टिविटी से और 1,150 मेगावाट क्षमता पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त हरित ऊर्जा (सौर व पवन ऊर्जा) से जोड़ी जा रही है।
मुंबई में 15 हजार करोड़ से 400 केवी का घेरा
इससे चौबीसों घंटे निरंतर चलने वाले इन एआई सर्वरों का कार्बन फुटप्रिंट भी शून्य के करीब बना रहेगा। देश के डिजिटल डेटा का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले मुंबई महानगर क्षेत्र में एक पल के लिए भी वोल्टेज ट्रिप या ड्रॉप से बचाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का विशाल ग्रिड अपग्रेडेशन प्लान लागू किया जा रहा है।
इसके तहत मौजूदा 110 केवी और 220 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ 400 केवी का एक मजबूत 'ट्रांसमिशन रिंग नेटवर्क' (चक्रीय ग्रिड) और आधुनिक सब-स्टेशन निर्मित किए जा रहे हैं।
इसका तकनीकी लाभ यह होगा कि यदि ग्रिड की कोई एक लाइन अचानक फेल भी हो जाए, तो दूसरी लाइन माइक्रो-सेकंड में लोड संभाल लेगी और डेटा फ्लो में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी।
2032 तक 26.3 गीगावाट पहुंचेगी खपत
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के नवीनतम आंकलनों के अनुसार, वर्ष 2031-32 तक केवल एआई और हाइपरस्केल डाटा सेंटरों के संचालन के कारण देश में 26.3 गीगावाट (26,300 मेगावाट) बिजली की अतिरिक्त मांग पैदा होगी।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत इस समय डिजिटल कंप्यूटिंग के सबसे तेज और बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है।
ऐसे में मजबूत ग्रिड और सतत हरित ऊर्जा का यह दूरदर्शी तालमेल भारत को वैश्विक स्तर पर एआई की महाशक्ति बनाने का मुख्य आधार साबित होगा।
