विदेशी यूरेनियम से दूरी, स्वदेशी ईंधन से परमाणु ताकत बढ़ाएगा भारत; फास्ट ब्रीडर रिएक्टर पर बड़ा फैसला
भारत अपनी सामरिक संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में स्वदेशी यूरेनियम का उपयोग करेगा। यूसीआइएल तमिलनाडु ...और पढ़ें

देश की सामरिक संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा को अभेद्य बनाए रखने के लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में केवल स्वदेशी यूरेनियम का इस्तेमाल किया जाएगा।
HighLights
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर उन्नत परमाणु ऊर्जा तकनीक है।
यूसीआइएल कलपक्कम रिएक्टर को ईंधन आपूर्ति करेगा।
जितेंद्र सिंह, जमशेदपुर। देश की सामरिक संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत रखने के लिए भारत अपने फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में स्वदेशी यूरेनियम का इस्तेमाल करेगा।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी और द्विपक्षीय परमाणु समझौतों की शर्तों के कारण रणनीतिक रिएक्टरों में विदेशी स्रोतों से प्राप्त ईंधन के इस्तेमाल पर कई सीमाएं लागू होती हैं।
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआइएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) काचम आनंद राव ने बताया कि तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के लिए ईंधन की आपूर्ति यूसीआइएल करेगा।
क्या है फास्ट ब्रीडर रिएक्टर
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर परमाणु ऊर्जा तकनीक की उन्नत प्रणाली है। इसमें बिजली उत्पादन के साथ नए विखंडनीय पदार्थ का उत्पादन किया जा सकता है।
इसी विशेषता के कारण इसे ‘ब्रीडर’ यानी ईंधन पैदा करने वाला रिएक्टर कहा जाता है। भारत के परमाणु कार्यक्रम में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
आयातित यूरेनियम से जुड़े परमाणु ईंधन और उससे बनने वाले पदार्थ पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और उपयोग संबंधी शर्तें लागू होती हैं।
ऐसे में भारत अपने रणनीतिक परमाणु प्रतिष्ठानों को बाहरी प्रतिबंधों और आपूर्ति संबंधी निर्भरता से दूर रखने के लिए घरेलू संसाधनों पर जोर दे रहा है।
तीन चरणों में आगे बढ़ रहा परमाणु कार्यक्रम
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन चरणों में विकसित किया गया है। पहले चरण में भारी जल रिएक्टरों से प्राप्त इस्तेमाल किए गए ईंधन से प्लूटोनियम निकाला जाता है।
दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों में इसी प्लूटोनियम का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जाता है। यह चरण भारत के तीसरे चरण के लिए आधार तैयार करता है।
तीसरे चरण में देश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थोरियम से यूरेनियम-233 जैसे विखंडनीय ईंधन का उत्पादन करने की परिकल्पना है। इससे दीर्घकाल में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को व्यापक आधार मिल सकता है।
रूस के बाद भारत की तकनीकी उपलब्धि
भारत ने फास्ट ब्रीडर तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। रूस के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने इस तकनीक को आगे बढ़ाया है।
अमेरिका और फ्रांस समेत कुछ देशों ने फास्ट ब्रीडर परियोजनाओं में तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण अपने कार्यक्रम सीमित या बंद किए हैं।
आनंद राव के अनुसार, परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत उत्पादन से जुड़े कई आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाते।
वर्तमान में यूसील देश की घरेलू परमाणु ईंधन जरूरत का करीब 30 से 40 प्रतिशत पूरा कर रहा है।
आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए झारखंड और आंध्र प्रदेश में विस्तार के साथ राजस्थान के रोहिल और कर्नाटक में नए खनन प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है।
