अन्वेश अंबष्ट, जमशेदपुर : वकील नहीं मिलने की वजह से जेल में अब किसी की रातें नहीं कटेंगी। इसके लिए जिला विधिक प्राधिकार (डालसा) ने कमर कस ली है। घाघीडीह जेल में बंद लगभग 150 विचाराधीन कैदियों की लड़ाई डालसा के पैनल वकील लड़ रहे हैं। इसके अलावा जिला विधिक प्राधिकार उन विचाराधीन कैदियों को लगातार कानून की जानकारी दे रहा है, जिन्हें कोई पूछने वाला नहीं है।

प्राधिकार यह बताता है कि जिस बंदी के पास वकील रखने की आर्थिक स्थिति नहीं है, उनकी लड़ाई डालसा के वकील लड़ेंगे। इसके लिए बंदियों को सिर्फ एक आवेदन देना होता है। पूर्वी सिंहभूम जिले के घाघीडीह सेंट्रल जेल में सजायाफ्ता कैदियों से अधिक संख्या विचाराधीन बंदियों की है। इनका मुकदमा अदालत में चल रहा है। इसमें ज्यादातर लोग चोरी, छिनतई, हत्या के प्रयास, उत्पाद अधिनियम, शादी की नीयत से अपहरण, रंगदारी, मारपीट जैसे मुकदमें में आरोपित हैं। इन विचाराधीन बंदियों में अधिकतर जमशेदपुर से सटे और सुदूर क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। दुर्भाग्य है कि इन्हें कोई देखने-सुनने वाला भी नही हैं। ऐसे बंदियों को कानूनी सहायता जिला विधिक प्राधिकार (डालसा) की ओर से दी जा रही है।

चोरी में एक वर्ष से हैं बंद

जेल में अमित सामद, सावन कालिंदी, सुजीत शर्मा, राजू लोहार, करण गोप, रतन, गणेश चितरा, सूरज महानंद, मो. फिरोज व सूरज चोरी में बंद हैं। इनकी लड़ाई डालसा लड़ रहा है।

अन्य मामले में हैं ये बंद

दामू साव, चंडी प्रमाणिक, सन्नी गोप, विजय केतन धरा, देवानंद बंका व कृणाल कुमार, लंबे समय से जेल में बंद हैं। वहीं हत्या के प्रयास में कृणाल महतो, संजय सिंह, बलवंत वर्मा, दहेज प्रताड़ना में सिदगोड़ा भुइयांडीह का पवन महतो, अपहरण के प्रयास में पिंटू गोप, उत्पाद अधिनियम के मामले में करण गोप की जिंदगी जेल में गुजर रही है। इसी तरह कालू महतो, संजय मछुआ, पिंकी पूर्ति, अनंत वर्मा, शंकर सोरेन, रवि साहू की पैरवी नहीं हो रही थी। इन्हें मुफ्त में वकील मुहैया कराया गया है।

जेल में पब्लिक वॉलंटियर

जिला विधिक प्राधिकार के सचिव एसएन सिकदर ने कहा कि जिन बंदियों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती है और वे वकील नहीं रख पाते हैं, उनकी पैरवी के लिए जिला विधिक प्राधिकार की ओर से वकील मुहैया कराया जाता है। जेल में पब्लिक लीगल वॉलियंटर को भी नियुक्त किया गया है। डालसा की ओर से अधिवक्ताओं की टीम जेल में जाती है। बंदियों की बताया जाता है कि उनके लिए मुफ्त में वकील रखने की व्यवस्था है। समय-समय पर जेल में अदालत लगाकर बंदियों की रिहाई भी होती है।

Posted By: Jagran