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पानी की बर्बादी और प्रदूषण पर लगेगी लगाम: अल्ट्रासोनिक तकनीक से सुरक्षित होगी बैटरी रीसाइक्लिंग

By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
Published: Sat, 17 Oct 2026 11:06 PM (IST)

आईआईटी आईएसएम धनबाद की शोधार्थी प्रतिमा कुमारी ने खराब लिथियम-आयन बैटरियों को सुरक्षित डिस्चार्ज करने की नई तकनीक का पेटेंट कराया है।

कदमा निवासी प्रतिमा कुमारी ने पारिवारिक और घरेलू दायित्वों को पूरी निष्ठा से संभालते हुए इस कठिन शोध को पूरा किया है।

कदमा निवासी प्रतिमा कुमारी ने पारिवारिक और घरेलू दायित्वों को पूरी निष्ठा से संभालते हुए इस कठिन शोध को पूरा किया है।

HighLights

  1. प्रतिमा कुमारी ने लिथियम-आयन बैटरी डिस्चार्ज तकनीक का पेटेंट कराया।

  2. आंशिक विसर्जन और अल्ट्रासोनिक तरंगों से सुरक्षित डिस्चार्ज संभव।

  3. पर्यावरण-अनुकूल, किफायती समाधान, जल और रसायन की बचत।

वेंकटेश्वर राव, जमशेदपुर। डिजिटल क्रांति के इस दौर में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से इलेक्ट्रॉनिक कचरा (E-Waste) पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। 
 
विशेष रूप से इनमें इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरियां रीसाइक्लिंग के दौरान अत्यधिक खतरनाक साबित होती हैं, क्योंकि इनमें मौजूद शेष विद्युत चार्ज के कारण आग लगने या विस्फोट होने का जोखिम बना रहता है।
 
इसी गंभीर समस्या का एक सुरक्षित, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल समाधान खोजते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी आइएसएम) धनबाद की पीएचडी शोधार्थी और जमशेदपुर के कदमा की रहने वाली प्रतिमा कुमारी ने उपलब्धि हासिल की है। 
 
प्रतिमा कुमारी को खराब लिथियम-आयन बैटरियों को safe तरीके से डिस्चार्ज करने की अपनी नई तकनीक के लिए भारत सरकार से पेटेंट प्रदान किया गया है।
 

क्या है यह नई और अनोखी तकनीक? 

पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में प्रो. सुख रंजन समद्यर के कुशल निर्देशन में किया गया यह शोध ‘प्रोसेस ऑफ डिस्चार्जिंग स्पेंट-लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड बैटरीज यूजिंग अल्ट्रासोनिक असिस्टेड पार्शियल इमर्शन मेथड’ नाम से पेटेंट हुआ है।
 
पारंपरिक तरीकों में खराब बैटरियों को पूरी तरह से किसी केमिकल या इलेक्ट्रोलाइट घोल में डुबोया जाता है, जिसमें भारी मात्रा में तरल पदार्थ की खपत होती है और पूरी बैटरी के रसायन घोल में घुलकर उसे जहरीला बना देते हैं। 
 
इस दूषित पानी/घोल का निस्तारण करना एक अलग चुनौती होती है। प्रतिमा कुमारी की नई ‘पार्शियल इमर्शन और अल्ट्रासोनिक’ तकनीक में बैटरी को पूरा डुबोने की जरूरत नहीं पड़ती। 
 
बैटरी को सीधा रखकर केवल उसके पॉजिटिव और नेगेटिव टर्मिनल वाले हिस्से को कम लागत वाले साधारण सोडियम क्लोराइड (NaCl) यानी नमक के घोल में आंशिक रूप से डुबोया जाता है। 
 
इसके बाद अल्ट्रासोनिक तरंगों की मदद से बैटरी को बेहद तेजी से और सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
 

पर्यावरण और उद्योग दोनों के लिए संजीवनी 

इस आविष्कार के कई बहुआयामी फायदे हैं:
 
  • जल और रसायनों की बचत: बैटरी को आंशिक रूप से डुबोने के कारण घोल का उपयोग काफी कम हो जाता है, जिससे संसाधनों की भारी बचत होती है। 
  • कम प्रदूषण: बैटरी का मुख्य ढांचा घोल के बाहर रहने से जहरीले पदार्थों का रिसाव नहीं होता, जिससे रासायनिक कचरा कम बनता है। 
  • श्रमिकों की सुरक्षा: रीसाइक्लिंग प्लांट्स में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आग लगने या केमिकल लीक होने का जोखिम न्यूनतम हो जाता है। 
  • कम लागत: सोडियम क्लोराइड आसानी से उपलब्ध और सस्ता पदार्थ है, जिससे इस तकनीक को औद्योगिक स्तर पर अपनाना बेहद आसान और व्यावहारिक है।
 

पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए पाया मुकाम 

कदमा निवासी प्रतिमा कुमारी ने पारिवारिक और घरेलू दायित्वों को पूरी निष्ठा से संभालते हुए इस कठिन शोध को पूरा किया है। उनकी यह वैज्ञानिक सफलता पर्यावरण संरक्षण और 'सर्कुलर इकोनॉमी' (Circular Economy) की दिशा में मील का पत्थर है।