जमशेदपुर/चक्रधरपुर जेएनएन। मानव तस्‍करी के लिए कुख्‍यात झारखंड के कोल्‍हान में एकबार फ‍िर मानव तस्‍करों की सक्रियता बढ़ रही है जो खास संकेत दे रहे हैं। खासकर कोल्‍हान का पश्चिमी सिंहभूम इस मामले में बदनाम रहा है। मावन तस्‍करी के मामले में यह जिला राज्‍य में ऊपरी पादान पर रहा है। 

पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर अनुमंडल के विभिन्न प्रखंडों के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में मजदूरों का पलायन कराने वाले एजेंट पुन: सक्रिय होने लगे हैं। इन एजेंटों में कई नये चेहरे भी शामिल हैं, जो पंजाब, दिल्ली उत्तर प्रदेश आदि अन्य प्रांतों से मजदूरों के साथ क्षेत्र में आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के सबसे बड़े त्योहार मकर व माघे पर्व मनाने के लिए मजदूर अपने-अपने क्षेत्र में आ गए हैं। इन दिनों रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों पर इनके समूह देखे जा रहे हैं। मजदूरों के प्रत्येक समूह में दूसरे राज्यों से आए एजेंट भी रहते हैं। जिनका उद्देश्य वापस लौटने के क्रम में गांवों से और अधिक मजदूरों को अपने साथ लेकर जाना है।

स्‍थानीय सरदारों से रहता संपर्क

सुदूरवर्ती गांवों में कई नए चेहरे दिखाई दे रहे हैं, जो एजेंट बताए जाते हैं। इनकी भाषा व रहन-सहन भी स्थानीय लोगों से भिन्न है। नए आए एजेंटो का सम्पर्क स्थानीय सरदारों के साथ रहता है। जिनके सहयोग से ही मजदूरों को पलायन कराने में वे सफल होते हैं। बताते हैं कि पलायन कराने वाले मजदूरों में महिलाओं की संख्या अधिक होती है। इन्हें अच्छा काम और आकर्षक मानदेय  आदि का सब्जबाग दिखाकर एजेंट अपने साथ ले जाते हैं। अक्सर उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में बेच दिया जाता है। इससे स्थानीय एजेंटों की भी मोटी कमाई होती है।

अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर जुड़े हैं तार

 कई बार एजेन्टों के गिरोह के तार अंतरराष्‍ट्रीय  स्तर पर भी जुड़े होने के संकेत मिले हैं। चंद वर्ष पूर्व गोईलकेरा के सोमराई के एजेंटों के चंगुल से बच निकलने के बाद इस तथ्य का खुलासा हुआ था। सोमराई को पंजाब प्रांत ले जाकर पाकिस्तान के एक सरदार के हाथों बेच दिया गया था। करीब एक वर्ष से भी ज्यादा समय तक वहां काम करने के पश्चात सोमराई वापस घर लौटने में सफल हो सका। 

रोजगार के अभाव में होता पलायन

इधर रोजगार के अभाव में मजदूरों का पलायन निरंतर जारी है। सरकारी उदासीनता और अदूरदर्शिता के कारण पलायन पर रोक फिलहाल असंभव सी दिख रही है। मजदूर पलायन की समस्या पूरे जिले को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। एक आकलन के अनुसार सुदूरवर्ती क्षेत्रों के सत्तर प्रतिशत घर ऐसे हैं, जहां से एक महिला अथवा पुरुष सदस्य रोजी-रोटी की जुगाड़ में पलायन कर चुका है। पिछले वर्ष दो सगी बहनों को दिल्ली में बेचे जाने का खुलासा होने के बाद मामले में सक्रिय गुलकेरा पंचायत के मुखिया पोंडेराम सामड युवतियों को दिल्ली से वापस लेकर आए थे।

मानव तस्‍करी है संगठित अपराध

मानव तस्करी एक संगठित अपराध है जिसमें विभिन्न स्थानों पर कई अपराधियों की अति या गुप्त भागीदारी शामिल है। मानव तस्करी आईपीसी की विभिन्न धाराओं और (आईटीपीए) सूचनात्मक यातायात (रोकथाम) अधिनियम 1956 की धारा -5 के तहत एक दंडनीय अपराध है। मानव तस्करी की रोकथाम के लिए झारखंड के आठ जिले में आठ एएचटीयू स्थापित हैं।

Posted By: Rakesh Ranjan

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस