जमशेदपुर(विकाश श्रीवास्तव)। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल के पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर में राष्ट्रीयधातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) की स्थापना 1950 में हुई। उसी वर्ष 26 नवंबर को लोहे से निर्मित राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ की प्रतिकृति का उद्घाटन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया। नेहरू जी ने कहा था- यह प्रतिबिंब हमारे देश के विज्ञान और उसकी शक्ति का प्रतीक है। 68 वर्ष बाद भी इसपर जंग नहीं लगी है। इसे टाटा स्टील कारखाने में बनाया गया था।

ऐसे अस्तित्व में आया स्तंभ

साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, न्यू दिल्ली के तत्कालीन डायरेक्टर डॉ. एसएस भटनागर की सोच का परिणाम है यह अशोक स्तंभ। उनकी सोच थी कि यहां धातु का एक ऐसा नमूना तैयार किया जाए, जो देश के विज्ञान के कल, आज और कल, यानी समृद्ध इतिहास को बताए। वर्तमान के लिए उपहार हो। भविष्य के लिए प्रेरणा बने। उनकी सोच अशोक स्तंभ पर शब्दों में अंकित है। पिलर के ऊपरी छोर पर चार शेर बनाए गए हैं। उद्घाटन मौके पर जेआरडी टाटा, जेजे गांधी, एनएमएल के तत्कालीन डायरेक्टर प्रो. चाल्र्स क्रूसेड जैसी हस्तियां मौजूद थीं।

कास्टिंग पद्धति से हुआ तैयार

इस अशोक स्तंभ का ढांचा टाटा स्टील में कास्टिंग पद्धति से तैयार किया गया था। एनएमएल के वैज्ञानिकों की टीम ने निर्माण में सहयोग किया था। पूरे स्ट्रक्चर को क्रेन से उठाकर एनएमएल तक लाया गया था।

क्यों नहीं लगती इसमें जंग

लोहे के साथ फास्फोरस मिलाकर इसे तैयार किया गया है। ठोस लोहे के पिलर पर हाइड्रोजन फास्फेट की परत चढ़ाई गई है। इस कारण इस पर जंग का असर नहीं होता है। वैसे तो एनएमएल के हर कोने में देश के धातु विज्ञान का इतिहास है, लेकिन परिसर में लगे अशोक स्तंभ की अनुकृति संस्थान के 68 वर्षों का इतिहास समेटे है।

Posted By: Rakesh Ranjan

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