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    भुईयांडीह से साकची तक गूंजा विरोध: बेघर परिवारों ने प्रशासन से पूछा अब ठंड में कहां जाएंगे, डीसी साहेब जवाब दो 

    By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
    Updated: Sat, 29 Nov 2025 08:23 PM (IST)

    जमशेदपुर में भुईयांडीह से साकची तक बेघर हुए परिवारों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि वे ठंड में कहां जाएंगे और डीसी से जवाब मांगा। विस्थापित परिवारों ने आश्रय की मांग की और आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने डीसी से हस्तक्षेप करने की मांग की।

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    शनिवार को भुईयांडीह से साकची तक प्रशासन और टाटा के खिलाफ महिलाओं ने की नारेबाजी।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। भुईयांडीह क्षेत्र में पिछले सप्ताह हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान के खिलाफ आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को भुईयांडीह से साकची तक का इलाका प्रशासन और टाटा विरोधी नारों से गूंज उठा। 
     
    बेघर हुए सैकड़ों महिला-पुरुष और बच्चों ने केंद्रीय बस्ती विकास समिति के बैनर तले, पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां के नेतृत्व में विशाल विरोध मार्च निकाला। मार्च के दौरान लोगों का एक ही सवाल था- अब ठंड में कहां जाएंगे बेघर परिवार? डीसी साहेब जवाब दो! और हमारे आशियाने क्यों उजाड़े गए, टाटा कंपनी जवाब दो! 

    विरोध मार्च भुईयांडीह से शुरू होकर साकची चौक होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने धरना दिया। इस दौरान महिलाओं के गोद में बच्चों को देखकर स्थिति और भी मार्मिक हो उठी। 
     
    भीड़ का दर्द साफ कह रहा था कि अपने दशकों पुराने घर टूटने के बाद लोग अब राहत की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां ने कहा कि 110 परिवारों के आशियाने एक झटके में उजाड़ दिए गए। 

    धरना स्थल पर संबोधित करते हुए दुलाल भुईयां ने कहा कि संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर भुईयांडीह श्मशान घाट, भुईयांनगर, इंदिरानगर और निर्मल नगर इलाके के लगभग 110 गरीब परिवारों का आशियाना तोड़ देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 

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    उन्होंने कहा कि इन इलाकों में मुख्य रूप से दलित, आदिवासी, पिछड़ा और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग रहते हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगाकर छोटे-छोटे मकान बनाए थे। 
     
    वर्षों से टाटा स्टील की ओर से यहां बिजली और पानी की व्यवस्था भी की जाती रही, जिससे निवासियों को भरोसा था कि उनका अस्तित्व सुरक्षित है। लेकिन अचानक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बिना पूर्व सूचना और बिना पुनर्वास के घरों को तोड़ना मानवीय दृष्टि से भी अनुचित है। 

    दुलाल भुईयां ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास, टाटा प्रबंधन और जिला प्रशासन के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई होगी। इसके बावजूद सर्दी के मौसम में परिवारों को बेघर करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

    धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं ने जानकारी दी कि वे यहां 50 वर्ष से अधिक समय से रह रही हैं। मौसमी कुमारी, लखी और ममता भुईयां ने कहा कि उनके पूरी जिंदगी के सपने इसी घर में जुड़े थे।  

    दुकानदार मिथु दास ने कहा कि दुकान टूटने से आय का स्रोत खत्म हो गया है। उन्‍होंने कहा कि दुकान भी गई, घर भी गया। अब परिवार कैसे चलाऊं? 

    ठंड में हालात बेहद कठिन हैं। स्थानीय लोग भोजन और कम्बल उपलब्ध कराकर मदद कर रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान अभी दूर दिख रहा है।