अमित तिवारी, जमशेदपुर : केरला का आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ अब शहरवासियों को नहीं मिलेगा। शनिवार से सोनारी स्थित कोटट्कल आयुर्वेद मेडिकल सेंटर हॉस्पिटल बंद हो जाएगा। इसका नोटिस हॉस्पिटल परिसर के कई जगहों पर लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रधान कार्यालय के निर्देश के अनुसार 20 अप्रैल (शनिवार) से ओपीडी, इनडोर व उपचार की सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी। असुविधा के लिए खेद है।

शुक्रवार को बंद होने की सूचना पाकर कई लोग अस्पताल पहुंचे और इसे बंद नहीं करने का गुहार लगाते रहे। कई लोगों ने फोन पर भी कारण जानने की कोशिश की। इसपर सेंटर के मेडिकल ऑफिसर जीथिन राज ने बताया कि टाटा स्टील के साथ पांच साल के लिए करार हुआ था, जो खत्म हो गया है। अब कंपनी ने बंद करने का निर्देश दिया है। इधर, हॉस्पिटल सूत्रों के अनुसार डेढ़ साल पूर्व चिकित्सा की दर बढ़ाने की वजह से मरीजों की संख्या घटती चली गई। नतीजा हुआ कि हॉस्पिटल घाटे में जाने लगी। इस कारण से केरला की कंपनी कोंट्टकल ने आगे के लिए टाटा स्टील के साथ करार करने से इन्कार कर दिया है। जमशेदपुर में कोंट्टकल सेंटर का उद्घाटन वर्ष 2013 में हुआ था। तब से लोगों का भरोसा आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति बढ़ते जा रहा था। यहां पर इलाज कराने के लिए बिहार, ओडिशा, रांची, धनबाद, बोकारो आदि क्षेत्रों से भी मरीज पहुंचते थे। कोंट्टकल का बिहार व झारखंड का यह पहला सेंटर है। यहां पर करीब 16 कर्मचारी व डॉक्टर तैनात हैं। सभी को वापस केरल बुला लिया गया है।

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टाटा कर्मियों को 20 फीसद मिलती है छूट

टाटा स्टील के दर्जनों कर्मचारी इस हॉस्पिटल में इलाज कराते हैं। इन कर्मचारियों को दवा पर पांच व पंचकर्म, मसाज सहित अन्य चिकित्सा पद्धति पर 20 फीसद की छूट दी जाती है। उद्घाटन के अगले दो साल तक हॉस्पिटल सही चला लेकिन उसके बाद से मरीजों की संख्या लगातार घटती गई। इसका मुख्य कारण प्रचार-प्रसार नहीं होना बताया जा रहा है। वर्ष 2013-14 में यहां पर इलाज कराने के लिए करीब 11 हजार लोग पहुंचे थे।

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10 बेड के हॉस्पिटल में इन बीमारियों का होता है इलाज

ओपीडी के अलावे भर्ती होने के लिए वातानुकूलित दस बेड की सुविधा है। यहां पर अर्थराइटिस, स्पांडिलाइटिस, माइग्रेन, लकवा, सिरदर्द, गैस, कब्ज, सांस के रोग, जोड़ों का दर्द, स्पांडिलाइटिस, पीठ दर्द, चर्म रोग, एलर्जी, सिर दर्द, मानसिक तनाव, अनिंद्रा, जीवन शैली से संबंधित बीमारी, स्त्री रोग, मातृत्व एवं शिशु संबंधी मरीजों का इलाज होता था। चिकित्सीय परामर्श मुफ्त था। सिर्फ दवा की कीमत देनी होती थी।

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आगे की योजना आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन पर था

उद्घाटन के वक्त कहा गया था कि शहर में इस हॉस्पिटल का विस्तार धीरे-धीरे किया जाएगा। आगे की योजना में आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन पर जोर देना था। इसके लिए झारखंड में पैदा होनेवाले औषधीय पौधों की खरीदने की योजना थी। इससे स्थानीय किसानों को स्व-रोजगार देकर आय बढ़ाने की कोशिश किया जाना था।

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सेंटर को बंद करने का आदेश आया है। इसे देखते हुए नोटिस लगाया गया है। जिन मरीजों का पूर्व से इलाज चल रहा है उन्हें कोलकाता ब्रांच में जाकर इलाज करानी होगी।

- जीथिन राज, मेडिकल ऑफिसर, कोटट्कल

Posted By: Jagran

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