जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) कॉलेज अस्पताल के ओपीडी के ठीक सामने एक अधेड़ व्यक्ति रविवार सुबह नौ बजे से लेकर शाम छह बजे तक पड़ा रहा। उसकी खोज खबर लेना वाला कोई नहीं था। वह चलने-फिरने में असमर्थ था, इसे देखते हुए किसी व्यक्ति ने उसके सामने पपीता लाकर जमीन पर रख दिया। उस व्यक्ति ने उस पपीता को हाथ से उठा कर खा लिया। शाम छह बजे के बाद वह पैरों को घसीटते हुए अस्पताल के बाहर चला गया। अस्पताल में यह स्थिति किसी एक मरीज की नहीं है, ऐसे सैकड़ों लोग रोजाना वहां से बगैर इलाज के चले जा रहे हैं।

विभाग की नींद नहीं खुल रही

अस्पताल की स्थिति बदतर हो गई है। यहां पर घायलों का जख्म भरने वाला न तो ड्रेसर है और न ही मरीजों को शिफ्ट करने वाला वार्ड ब्याय। मरीजों का इलाज राम भरोसे चल रहा है। अधिकांश मरीजों की समय पर न तो जांच हो रही है और न ही इलाज मिल पा रहा है। कारण कि मरीजों को पैथोलॉजी सेंटर व रेडियोलॉजी विभाग ले जाने के लिए कर्मचारी नहीं है। बिगड़े व्यवस्था से नाराज अस्पताल के डॉक्टर, कर्मचारी व मरीज सभी तंत्र के आलाकमान को कोस रहे हैं। लेकिन विभाग की नींद नहीं खुल रही है।

छह मार्च से और बिगड़ जाएगी स्थिति

आउटसोर्स के लगभग 160 कर्मचारी कम हो गए हैं। इससे अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। एमजीएम अस्थायी मजदूर संघ की ओर से रविवार को अस्पताल परिसर में एक बैठक की गई। इसमें नौकरी से निकाले गए आउटसोर्स कर्मचारी व ड्यूटी पर तैनात आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हुए। संघ के सचिव भगवान दूबे ने बताया कि अस्पताल में जरूरत होने के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी से निकाल देना दुखद है। इसके लिए अस्पताल के सारे आउटसोर्स कर्मचारी एकजुट हुए हैं। संघ से जुड़े जो कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं, वे सभी सोमवार से काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इसके बाद भी सरकार की तरफ से अगर कोई पहल नहीं की गई तो छह मार्च से सारे आउटसोर्स कर्मचारी हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे। बैठक में डेढ़ सौ से अधिक कर्मचारी शामिल थे।

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