जासं, जमशेदपुर : हर वर्ष डायरिया की चपेट में आनेवाले बागबेड़ा के पांच गांवों में इस साल भी डायरिया फैलने की आशंका है। यहां के पांच गांव अति संवेदनशील माने जाते हैं। इसमें सोमाय झोपड़ी, रानीडीह, मतलाडीह, जटाझोपड़ी और गिद्दी झोपड़ी शामिल हैं। बीते तीन साल में 28 लोगों की मौत हो चुकी है। कई मामले तो सामने भी नहीं आते हैं। सोमाय झोपड़ी में दस साल पूर्व एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थी। खैर, इसबार भी पूरा बागबेड़ा क्षेत्र गंदगी से बजबजा रहा है। वायरलैस मैदान के पास सड़क पर करीब आधा किलोमीटर तक गंदगी पसरी हुई है। सो, डायरिया और मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इन पांच गांवों में डायरिया, पीलिया, मलेरिया की वजह गंदगी है। अधिकतर घरों में पानी व शौचालय की व्यवस्था नहीं है। चापाकल व कुआं से निकलने वाले पानी की जांच नहीं होती है। अंडरग्राउंड नाली नहीं है। घर के आगे बजबजाती नालियां और उसी में रहने को लोग मजबूर हैं। घर के आंगन में ही सूअर, कुत्ते जैसे जानवर खुले में फैलाते गंदगी। नालियों में उत्पन्न होने वाले कीड़े मकोड़े थाली तक पहुंच बनाए हुए हैं। इस इलाके के चापाकल व कुआं सूख गए हैं। पानी के लिए दो-पांच किलोमीटर दूर लोग कुआं पर जाते थे। महिलाएं स्नान व कपड़ा धोने के लिए तलाब में जाती हैं। तलाब का पानी गंदगी से काला पड़ गया है। ग्रामीण इसी तलाब में स्नान के साथ साथ शौच धोने भी जाते हैं।

----- कहां कितने की

हो चुकी है मौत

- सोमाय झोपड़ी : यहां वर्ष 2017 में डायरिया से पांच लोग मरे थे।

- रानीडीह : चार साल में 19 लोगों की मौत हो चुकी है।

- मतलाडीह : वर्ष 2016 में दो लोगों की मौत डायरिया से हो गई थी।

- जटाझोपड़ी : 2015 में पीलिया से दो लोगों की मौत हो गई थी।

- गिद्दी झोपड़ी : वर्ष 2017 में डायरिया का यहां प्रकोप अधिक रहा है।

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कोट --

मेरे पति व भतीजे की बीते वर्ष डायरिया से मौत हो गई थी। उससे पूर्व सात लोगों ने जान गंवा दिए थे। इसके बावजूद न तो नालियां बनीं और न ही पेयजल का प्रबंध हुआ। घर के आगे नालियां बजबजा रही हैं। इसबार भी बीमारी फैलने की आशंका से लोग सहमे हुए हैं।

- शुकरमनी सोय, सोमाय झोपड़ी। बागबेड़ा क्षेत्र में डायरिया फैलता रहा है। इसे लेकर एक रिपोर्ट भी तैयार की गई है। इसमें महामारी फैलने का मुख्य वजह गंदगी व दूषित पानी को बताया गया है। रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजी गई थी। बरसात के दिनों में डायरिया, मलेरिया, पीलिया फैलने की संभावना यहां बढ़ जाती है।

- डॉ. महेश्वर प्रसाद, सिविल सर्जन।

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By Jagran