जमशेदपुर, जासं। सुहागिनों का महत्वपूर्ण व्रत हरियाली तीज बस आने ही वाला है। यह सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को होता है। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं संतान प्राप्ति और पति के दीर्घायु होने का आशीर्वाद मांगती हैं। जमशेदपुर सहित पूरे भारत में यह पर्व मनाया जाता है। हरियाली तीज में महिलाएं निर्जला व्रत करती है। निर्जला व्रत के दौरान पानी पीना भी मना होता है। 

इस व्रत में महिलाएं उपवास रहकर माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दोबारा मिलन हुआ ​था। हरियाली तीज के दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। नवविवाहित या जिन्हें संतान नहीं है, वे संतान प्राप्ति व सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना करती है। हरियाली तीज को निर्जला व्रत रखकर पति के धन-धान्य से परिपूर्ण रहने के साथ अखंड सुहाग का वरदान मांगती हैं। इसी कारण से हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 

व्रत का मुहूर्त

पं अयोध्या प्रसाद वाजपेयी बताते हैं कि तीज का व्रत सावन माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह इस बार 10 अगस्त मंगलवार को संध्या 6.05 बजे प्रारंभ होगा। लेकिन हिंदुओं का एक बड़ा वर्ग उदया तिथि को व्रत का प्रारंभ करता है। इस वजह से यह व्रत 11 अगस्त को मनाया जाएगा। तृतीया तिथि 11 अगस्त बुधवार को संध्या 4.53 बजे समाप्त हो जाएगा। पूरे दिन रवि योग भी रहेगा, इसलिए पूजा-अर्चना का विधि-विधान इस अवधि तक संपन्न करना श्रेयस्कर रहेगा।

सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व

हरियाली तीज में सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है, इसलिए महिलाएं सोलह श्रृंगार में सज धज कर पूजा करती हैं। सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को भी श्रृंगार प्रसाधन की वस्तुएं अर्पित करती हैं। पूजा के बाद महिलाएं पति का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद मांगती हैं।

Edited By: Jitendra Singh