विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गुरुग्राम हादसा: 'अगली बार आऊंगा तो गहने लाऊंगा...', वो वादा जो मिट्टी के ढेर में दफन हो गया

Published: Tue, 10 Mar 2026 10:37 PM (IST)Updated: Wed, 11 Mar 2026 01:56 PM (IST)

गुरुग्राम के सिधरावली में निर्माणाधीन साइट पर मिट्टी धंसने से सात मजदूरों की मौत हो गई। इनमें झारखंड के जादूगोड़ा ...और पढ़ें

मृतक भगीरथ गोप और मंगल महतो का फाइल फोटो।

मृतक भगीरथ गोप और मंगल महतो का फाइल फोटो।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

संवाददाता सूत्र, जादूगोड़ा। "उन्होंने कहा था कि वहां टाटा स्टील (ठेका मजदूरी) से ज्यादा पैसे मिलेंगे। बच्चों की पढ़ाई और घर की मरम्मत के लिए कुछ जोड़ लूंगा। फरवरी की उस सुबह जब वह रेलगाड़ी में बैठ रहे थे, तो मुस्कुराकर कहा था- अपना ख्याल रखना, अगली बार आऊंगा तो तुम्हारे लिए गहने और बच्चों के लिए नए कपड़े लाऊंगा।" Jharkhand Top Story 

बेहतर जिंदगी की तलाश में कोसों दूर से हरियाणा आए थे 

झारखंड के जादूगोड़ा स्थित बनगोड़ा गांव की एक बदहवास पत्नी के ये शब्द उस त्रासदी की कहानी कह रहे हैं, जिसने सात परिवारों के चिराग बुझा दिए।

सोमवार की रात गुरुग्राम के सिधरावली में सिग्नेचर ग्लोबल सोसायटी की निर्माणाधीन साइट पर मिट्टी धंसी, तो सिर्फ मजदूर नहीं दबे, बल्कि उन सैकड़ों सपनों की भी मौत हो गई जो बेहतर जिंदगी की तलाश में कोसों दूर से हरियाणा आए थे। Gurugram Accident 

टाटा स्टील की ठेका मजदूरी छोड़ क्यों गए गुरुग्राम? 

मृतकों में शामिल जादूगोड़ा के चार युवक- मंगल महतो, भगीरथ गोप, धनंजय महतो और संजीव और बनिहारा पूर्वी सिंहभूम के शिवशंकर व होन्डई पूर्वी सिंहभूम परमेश्वर महतो के अलावा बुरका जडथल नगर, भरतपुर राजस्थान के सतीश एक महीने पहले ही एक दलाल के माध्यम से काम की तलाश में गुरुग्राम पहुंचे थे। Gurugram Haryana
 
इससे पहले ये युवक जमशेदपुर की टाटा स्टील में ठेका मजदूर के रूप में काम करते थे। लेकिन वहां मिलने वाली कम मजदूरी और अनिश्चित भविष्य ने उन्हें पलायन के लिए मजबूर किया। 
 
उन्हें लगा था कि गुरुग्राम की ऊंची इमारतों के निर्माण में उनके पसीने की कीमत ज्यादा मिलेगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।वे एक हादसे में काल के गाल में समा गए। 

एक झटके में उजड़ गई दुनिया 

हादसे के वक्त बेसमेंट की खुदाई चल रही थी। करीब 25 मजदूर वहां मौजूद थे, जब अचानक मिट्टी की एक विशाल दीवार भरभराकर गिर पड़ी। 
 
संजीव उर्फ दुलाल गोप और मंगल महतो जैसे युवक, जो अपनी पत्नियों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा देकर निकले थे, मिट्टी के नीचे दब गए। 
image

गुरुग्राम में हादसे की जानकारी के बाद जादूगोड़ा के बनगोड़ा गांव में पसरा सन्‍नाटा।

सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया 

भगीरथ गोप के पीछे उनकी चार बेटियां और एक छोटा बेटा गौरव है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। वहीं मंगल महतो का छह साल का बेटा तनिश अब भी अपनी मां मधुलिता महतो से पूछ रहा है कि 'पापा कब आएंगे?' मधुलिता, जो खुद सदमे में हैं, भारी मन से अपने पति के शव को लाने के लिए निजी वाहन से हरियाणा रवाना हो चुकी हैं। 

सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल 

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा है। बेसमेंट की इतनी गहरी खुदाई के दौ रान क्या पर्याप्त सुरक्षा घेरा (Shoring) बनाया गया था? क्या मजदूरों की जान की कीमत उन ऊंची इमारतों के मुनाफे से कम है?  

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के रहने वाले इन मजदूरों की मौत ने एक बार फिर उस कड़वे सच को सामने ला दिया है कि राज्य में रोजगार की कमी कैसे युवाओं को मौत के कुएं में धकेल रही है। बनगोड़ा गांव में आज चूल्हा नहीं जला है। 
 
सन्नाटा इतना गहरा है कि सिसकियों की आवाज दूर तक सुनाई दे रही है। जिन हाथों में अपनों के लिए उपहार होने चाहिए थे, आज उन घरों में उनके शव पहुंचने का इंतजार हो रहा है। 

इन मजदूरों की हुई मौत 

  1. मंगल महतो                बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड
  2. भगीरथ गोप                बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड 
  3. धनंजय महतो              बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड
  4. संजीव उर्फ दुलाल गोप    बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड
  5. शिवशंकर                  बनिहारा पूर्वी सिंहभूम झारखंड
  6. परमेश्वर महतो             होन्डई पूर्वी सिंहभूम झारखंड
  7. सतीश                      बुरका जडथल नगर, भरतपुर राजस्थान

यह भी पढ़ें- गुरुग्राम में झारखंड के 6 मजदूरों समेत 7 की मौत, कंस्ट्रक्शन साइट पर मिट्टी धंसने से हुआ हादसा