हरित इस्पात को बढ़ावा: डॉ. वीके सारस्वत बोले- बड़े पैमाने पर उत्पादन से घटेगी हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइजर की कीमत
नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने जमशेदपुर में 'चक्रीय अर्थव्यवस्था सम्मेलन' में हरित इस्पात उत्पादन की उच्च लागत को कम करने के उपायों पर चर्चा की।

जमशेदपुर के बेल्डीह क्लब में आयोजित दो दिवसीय चक्रीय अर्थव्यवस्था सम्मेलन में पहुंचे नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके सारस्वत।
HighLights
हरित इस्पात उत्पादन लागत घटाने को बड़े पैमाने पर उत्पादन।
केंद्र सरकार हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइजर उत्पादन बढ़ाएगी।
कार्बन ट्रेडिंग, जलमार्गों से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास की दिशा में हाइड्रोजन आधारित इस्पात (ग्रीन स्टील) उत्पादन तकनीक बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी उच्च लागत वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इस लागत को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार अब हाइड्रोजन और इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले विद्युत अपघटक (इलेक्ट्रोलाइज़र) के बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।
यह बात नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने जमशेदपुर के बेल्डीह क्लब में आयोजित दो दिवसीय 'चक्रीय अर्थव्यवस्था सम्मेलन-2026' के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।
इस सम्मेलन का आयोजन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (जमशेदपुर चैप्टर), टाटा स्टील, सीएसआईआर-एनएमएल और इंडियन सेरामिक सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा आधारित इस्पात उत्पादन
डॉ. सारस्वत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में हाइड्रोजन आधारित इस्पात उत्पादन से लागत बढ़ जाती है, जिससे अंतिम उत्पाद महंगा हो जाता है।
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा से हाइड्रोजन बनाने की दिशा में कई कंपनियां काम कर रही हैं। इसके लिए आवश्यक इलेक्ट्रोलाइज़र की लागत काफी अधिक है।
सरकार कंपनियों को सीमित मात्रा में उपकरण बनाने के बजाय बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि प्रति इकाई लागत घट सके।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस और क्षैतिज चाप जैसी नई तकनीकों के ज़रिए कम ऊर्जा और कम लागत में इस्पात बनाने की संभावनाओं पर शोध जारी है।
कार्बन मार्केट और जलमार्ग से लागत कटौती
कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए केंद्र सरकार की कार्बन व्यापार योजना (Carbon Trading Scheme) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि निर्धारित मानकों को हासिल करने वाली औद्योगिक इकाइयों को कार्बन सर्टिफिकेट दिए जाएंगे, जिससे उद्योगों को आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।
माल ढुलाई की समस्या पर बात करते हुए डॉ. सारस्वत ने बताया कि सरकार केवल सड़क और रेल पर निर्भर न रहकर जलमार्गों को सशक्त बना रही है।
हल्दिया से प्रयागराज तक विकसित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) के ज़रिए माल परिवहन से लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आ रही है।
ट्रिपल हेलिक्स मॉडल और नवाचार में भारत की छलांग
विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए डॉ. सारस्वत ने उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों (R&D) के बीच बेहतर समन्वय (ट्रिपल हेलिक्स मॉडल) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के व्यावसायिक उपयोग से भारतीय उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत होंगे।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के आंकड़ों के अनुसार, भारत 2014 में 76वें स्थान पर था, जो 2025 में 139 देशों की सूची में सुधरकर 38वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत का लक्ष्य जल्द ही दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल होना है।
