जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नगद प्रवाह रहित अर्थव्यवस्था बनाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में सभी करदाताओं, खासकर व्यापारी व व्यावसायिक वर्ग को विशेष ध्यान देना होगा।

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया, जमशेदपुर शाखा द्वारा शनिवार को बिष्टुपुर स्थित एक होटल में केंद्रीय बजट व गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। पहले सत्र में केंद्रीय बजट पर विशेष जानकारी देते हुए कोलकाता से आए सीए एसएस गुप्ता ने ये बातें कहीं। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था जल्द ही नगद प्रवाह के बजाय इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने वर्तमान बजट में दो बदलाव किए हैं। पहला, यदि कोई करदाता अपने बैंक खाते में एक करोड़ रुपये जमा किया है तो उन्हें अपने इनकम टैक्स रिटर्न में इसकी जानकारी अनिवार्य रूप से देनी होगी। दूसरा, यदि कोई व्यवसायी एक वर्ष में एक करोड़ से अधिक की निकासी करता है तो सरकार उस पर दो प्रतिशत का टैक्स लगाएगी इसलिए व्यवसायी वर्ग को इससे सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं, दूसरे सत्र में नई दिल्ली से आए सीए राजेंद्र अरोड़ा ने जीएसटी के इनपुट, आउटपुट क्रेडिट और ब्लॉक क्रेडिट के विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी में जिस तेजी से संशोधन हो रहा है उससे सभी प्रैक्टिसनर और प्रोफेशनल को गहराई से इसका नियमित रूप से अध्ययन करना होगा। इससे पहले सेमिनार का उद्घाटन जमशेदपुर शाखा के चेयरमैन सीए विनोद सरायवाला, संचालन वाइस चेयरमैन संजय गोयल और धन्यवाद ज्ञापन संजय संघारी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सीए महेश अग्रवाल, रवि अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, अजय बाजैसरिया, जगदीश खंडेलवाल, प्राण नाथ संघारी, प्रीति दोदराजका, मेघा गुप्ता, उषा पांडेय, सतबीर सिंह भाटिया, विनोद अग्रवाल सहित अन्य उपस्थित थे।

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Posted By: Jagran