जमशेदपुर, जासं। टाटा वर्कर्स यूनियन में हुए निर्वाचन पदाधिकारी (आरओ) चुनाव में अब तक यह स्पष्ट हो गया है कि किस टीम का पलड़ा भारी है। 203 में से विपक्ष ने 117 का आंकड़ा जुड़ा कर विजेता बनी। वो भी तब जब सत्ता पक्ष से अध्यक्ष आर रवि प्रसाद सहित आठ ऑफिस बियरर एक साथ थे।

इसके बावजूद पूरी सत्ता पक्ष अपने आरओ उम्मीदवार को हीं जीता पाई। लेकिन इस जीत के बाद टाटा वर्कर्स यूनियन, खासकर विपक्ष के कमेटी मेंबरों की जुबां पर एक भी बात पर चर्चा होती रही कि अब तेरा क्या होगा अरविंद। क्योंकि आरओ चुनाव के बाद लगभग स्पष्ट हो गया है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष यूनियन की सत्ता से कितने दूर या पास हैं। अरविंद ने प्रेशर गेम से खुद को सत्ता पक्ष से अध्यक्ष पद का उम्मीदवार तो घोषित करवा लिया लेकिन जीतने के लिए समर्थक कहां से लाएंगे।

विपक्ष कह रहा ये बात

विपक्ष के कमेटी मेंबरों का कहना है कि अरविंद यदि विपक्ष के साथ होते तो जीत का सेहरा पहनते। लेकिन उन्होंने विपक्ष से दगाबाजी की और सत्ता पक्ष से अपने आरओ उम्मीदवार को जीता भी नहीं पाई। लेकिन कमेटी मेंबरों को अभी भी डर सता रहा है कि कहीं अरविंद और उनके प्रिय शिष्य नाव डूबते देख फिर न पलटी मार दें। लेकिन विपक्ष के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे दोस्ती में धोखा एक ही बार खाएंगे, बार-बार नहीं। इसलिए अब ऐसे मौका परस्त लोगों के लिए उनके यहां नो इंट्री है। लेकिन ये चुनाव और राजनीति में सत्ता का मोह क्या न करा दें। देखना है कि मुख्य चुनाव होते तक और क्या-क्या देखने को मिलेगा।

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