जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : ईद-उल-अजहा का त्योहार सोमवार को शहर में पूरे अकीदत व एहतेराम के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर लोग अल्लाह की राह में बकरों की कुर्बानी देंगे। आमबगान बकरा बाजार में आखिरी दिन गोलू 80 हजार रुपये और सलमान 65 हजार रुपये में बिका। दोनों बकरों की बकरीद पर कुर्बानी होगी। लोगों का अनुमान है कि इस साल बकरीद पर पांच करोड़ रुपये के बकरों का कारोबार हुआ है। आखिरी दिन एक करोड़ रुपये तक के बकरे बिके हैं।

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इस बार होगी दुंबे की कुर्बानी

आमबगान में इस बार दुंबे भी बिकने के लिए आए हैं। एक दुंबा 60 हजार रुपये में बिका। बाजार में मौजूद मो. इस्लाम ने बताया कि हजरत इस्माइल अ. की जगह पर कुर्बानी के लिए दुंबा ही आया था। इसलिए दुंबे पर कुर्बानी को तरजीह दी जाती है।

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कुर्बानी के लिए रांची से बुलाए गए कसाब

जमशेदपुर में कुर्बानी के लिए कसाब नहीं मिल रहे हैं। कुर्बानी अमूमन बकरीद की नमाज से पहले होनी चाहिए। लेकिन, शहर में इतने कसाब नहीं है जो घर-घर जाकर कुर्बानी कर सकें। इसलिए पांच-छह लोगों ने मिल कर रांची से कसाब बुलाए हैं।

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बाजार गुलजार, खूब बिकी सेवइयां

ईद-उल-जोहा की पूर्व संध्या पर शहर के बाजार गुलजार रहे। सेवइयां और लच्छे खूब बिके। यही नहीं, लोगों ने नए कपड़ों की भी खूब खरीद-फरोख्त की। मानगो रोड नंबर दो, ओल्ड पुरुलिया रोड, धतकीडीह, जुगसलाई, शास्त्रीनगर और साकची जामा मस्जिद के पास बकरीद के बाजार में देर रात तक खरीद-फरोख्त हुई।

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साल का पहला व आखिरी महीना कुर्बानी का

इस साल मुसलमानों के बीच एक मैसेज काफी वाइरल रहा। इसमें बकरीद और मुहर्रम की तुलना की गई है। मैसेज में है कि साल का पहला महीना मुहर्रम भी कुर्बानी का जिसमें पैगंबर के लाल इमाम हुसैन अ. ने अपनी कुर्बानी पेश की और आखिरी महीना भी कुर्बानी का। बकरीद में जिसकी कुर्बानी होने वाली थी वह नबी हजरत इब्राहिम के लाल हजरत इस्माइल अ. थे। मुहर्रम महीने में जिनकी कुर्बानी हुई वह भी नबी के लाल थे। मुहर्रम में हुई कुर्बानी की भी याद मनाई जाती है। बकरीद की कुर्बानी भी याद मनाई जाती है। बकरीद की कुर्बानी को जिबह-ए-अजीम में तब्दील किया। वह जिब्हे अजीम उलेमा के मुताबिक इमाम हुसैन की कुर्बानी थी। उन्होंने ख्वाब निभाया। इमाम हुसैन ने नाना से वादा निभाया। वो सब्र की इब्तेदा। ये सब्र की इंतेहा। वो काबे का बनाने वाला। यह काबे का बचाने वाला।

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ईद उल अजहा पर रखें इस बात का ख्याल

-- रास्तों और सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी नहीं करें।

-- बाउंड्री वाल के अंदर अहाते में कुर्बानी करें।

--कुर्बानी का खून नालियों में नहीं बहाएं इसे जमीन में दफन कर दें।

-- जानवरों के वो अंग जो खाए नहीं जाते इन्हें फौरन जमीन में दफन कर दें वरना इनके खुले में रहने से बीमारी फैलती है। डेंगू का खतरा है। इनके कीटाणु की जद में आने से लोगों के खून के प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं।

-- प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी बिल्कुल नहीं करें। बकरा और दुंबा की ही कुर्बानी करें तो बेहतर है।

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शहर में बकरीद की नमाज का समय

शास्त्री नगर सलफी मस्जिद 6.15 बजे

बालीचेला सोनारी मस्जिद 7.45 बजे

सलफी मस्जिद अहले हदीस प्रोफेसर कालोनी जेकेएस कॉलेज के पास 6.10 बजे

अहले हदीस मस्जिद कपाली 5.45 बजे

अहले हदीस मस्जिद शास्त्रीनगर 6.15 बजे

अहले हदीस मस्जिद जुगसलाई 6.00 बजे

अहले हदीस मस्जिद टेल्को 6.00 बजे

मस्जिद ए मोहम्मदी मखदुमपुर 5.45 बजे

मस्जिदे अक्सा जवाहर नगर 6.20 बजे

जामा मस्जिद अहले हदीस जाकिर नगर 6.00 बजे

अहले हदीस मस्जिद कपाली 5.50 बजे

अबूजर गफ्फारी मस्जिद 6.15 बजे

मस्जिद ए रहमान साकची 6.00 बजे

साकची जामा मस्जिद 6.30 बजे

आमबागान मस्जिद साकची 8.00 बजे

पैगाम इस्लाम मस्जिद गुलाब बाग 7.30 बजे

इमाम हुसैनी मस्जिद जाकिर नगर 7.30 बजे

शिया जामा मस्जिद जाकिर नगर 9.00 बजे

मुंशी मोहल्ला मदरसा हुसैनिया 6.00 बजे

धतकीडीह बड़ी मस्जिद 7.45 बजे

धतकीडीह ईदगाह 8.00 बजे

आजाद नगर ईदगाह मैदान 8.30 बजे

मुंशी मोहल्ला मस्जिद 7.30 बजे

बारी मस्जिद आजाद नगर 8.00 बजे

जुगसलाई जामा मस्जिद 7.30 बजे

जुगसलाई ईदगाह 8.00 बजे (बारिश होने पर ये नमाज कादरी मस्जिद में होगी)

टेल्को बडी मस्जिद 7.30 बजे

सोनारी खूंटाडीह मस्जिद 8.00 बजे

बर्मामाइंस ईदगाह 7.30

टेल्को ईदगाह 7.30

भालूबासा मस्जिद 7.30

गोलमुरी मस्जिद 8.00

माहवारी शरीफ दरगाह बागबेड़ा 8.30

मकदमपुर मस्जिद 7.00

मकदमपुर मस्जिद दूसरी जमात 8.00

मस्जिद ए मेराज जुगसलाई 7.30

मस्जिद ए नबीहन जुगसलाई 7.15

मस्जिद ए गरीब नबाज 7.00

जुगसलाई जामा मस्जिद 7.30

अहले हदीस मस्जिद जुगसलाई 6.00

अहले हदीस मस्जिद टेल्को 6.00

Posted By: Jagran

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