संवाद सूत्र, मुसाबनी। स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी ने पूरी ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। आजाद भारत में उनकी प्रतिमा उपेक्षित है। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी थाना केेे ठीक सामने गांधी पार्क में स्थापित उनकी प्रतिमा की छड़ी खंडित हो चुकी है। गांधीजी के गले की माला काली हो गयी है। आंखों पर लगा गोल चश्मा गायब हो चुका है। महात्मा गांधी की सफेद प्रतिमा का रंग काला पड़ने लगा है।

महात्मा गांधी की प्रतिमा का ये हाल कई साल से है। इस प्रतिमा की हालत सुधारने का काम कभी नहीं हुआ। 2 अक्टूबर को जयंती और 30 जनवरी को पुण्यतिथि के एन पहले प्रतिमा की सफाई के सिवा यहां आज तक कोई काम नहीं हुआ। 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर सामाजिक कार्यकर्ता, क्षेत्र के आला अधिकारी व आमजन उनकी मूर्ति पर फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि देना नहीं भूलते। लेकिन इस वक्त भी गांधीजी के चेहरे पर चश्मे का नहीं होना उन्हें दिखाई नहीं देता।

मुसाबनी थाना के ठीक सामने सड़क पर उड़ती धूल के बीच अहिंसा के पुजारी की प्रतिमा को उसी हाल में यहां के राजनेता एवं प्रशासन ने छोड़ दिया है। मुसाबनी थाना के पुलिस अधिकारियों को भी इस प्रतिमा से कुछ लेना देना नहीं है। तभी तो राष्ट्रपिता की प्रतिमा पुलिस पदाधिकारियों की आंखों के समक्ष उपेक्षित है। जबकि इस गांधी जी की प्रतिमा का उद्घाटन मुसाबनी के तत्कालीन प्रशिक्षु डीएसपी दीपक कुमार ने किया था। शहर के सबसे प्रमुख रोड पर स्थित प्रतिमा स्थल के आसपास झाडियां उगी हैं। इसकी नियमित सफाई भी नहीं होती। महापुरूषों की प्रतिमा व उनके किए गए कार्यों का सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है। लेकिन मुसाबनी में इस जिम्मेवारी से अपने आप को समाजसेवी कहने वाले लोग, नेता, प्रशासनिक पदाधिकारी दूर-दूर चल रहेे हैं। बापू के जिस चश्मा को केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान का लोगो बनाया है। जो हर जगह नज़र आता है जो मुसाबनी में बापू की प्रतिमा में आंखों से गायब है। प्रतिमा का रंग रोगन नहीं होने के कारण यह बिल्कुल जर्जर हो चुकी है। जिस चबूतरे पर प्रतिमा लगी है वह पूरी तरह टूट फूट गया है। महात्मा गांधी के हाथ की छड़ी में कपड़ा लपेटकर काम चलाऊ बनाया गया है।

Edited By: Rakesh Ranjan