अमित तिवारी, जमशेदपुर : शहर के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहन कुमार की हार्ट अटैक से हुई मौत को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने गंभीरता से लिया है। छह साल में शहर के पांच डॉक्टरों की मौत हार्ट अटैक से हो चुकी है।

आइएमए जमशेदपुर शाखा ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर चिंता जाहिर की है। इसमें कहा गया है कि अत्यधिक काम के बोझ के कारण महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहन कुमार की असामयिक मौत हुई है। एमजीएम में करीब 75 फीसद डॉक्टर व कर्मचारियों की कमी है। इधर, मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों पर बोझ बढ़ता जा रहा है और वे तनाव में आ गए हैं। डॉक्टर की कमी होने की वजह से रात-बिरात जब भी उन्हें फोन आता तो जाना पड़ता है।

हाल ही में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की राष्ट्रीय शाखा का एक सर्वे चौंकाने वाला है। देश डॉक्टरों में करीब 82.7 फीसद अपने पेशे से तनाव में हैं। वहीं 75 फीसद डॉक्टर ऑन ड्यूटी चिकित्सक कहीं न कहीं शारीरिक ¨हसा के शिकार हुए हैं। इनमें 50 फीसद से अधिक वारदातें आइसीयू में होती हैं।

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तनाव का हार्ट अटैक से सीधा संबंध

आइएमए के संयुक्त सचिव सह हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि तनाव का हार्ट अटैक व स्ट्रोक से सीधा संबंध होता है। तनाव के स्तर में इजाफा होने से एंड्रालाइन और कोरटिसोल के स्तर में इजाफा होता है। तनाव और हार्ट अटैक में गहरा संबंध होता है। इसके साथ ही तनाव के कारण रक्त के थक्के जमने लगते हैं, इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

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हार्ट अटैक से जान गंवा चुके हैं ये डॉक्टर

- एमजीएम अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. एसएस प्रसाद का 25 अगस्त 2013 को ड्यूटी के क्रम में ही हार्ट अटैक आ गया था। इसके कुछ ही देर के बाद उनकी मौत हो गई।

- एमजीएम अस्पताल के महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके चौधरी का भी निधन वर्ष 2015 में हार्ट अटैक से हो गया था। डॉ. चौधरी कई बड़े-बड़े सर्जरी कर शहर में लोकप्रिय हुए थे।

- आइएमए के अध्यक्ष सह टाटा मुख्य अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी ठाकुर को एक अप्रैल 2017 को अस्पताल परिसर में ही हार्ट अटैक हो था। इसके कुछ ही मिनट के बाद उनकी मौत हो गई थी।

- एमजीएम अस्पताल के ईएनटी विभाग में तैनात डॉ. ओम शंकर की मौत भी वर्ष 2015 में हार्ट अटैक से हो गई थी। वे मरीजों के चहेता थे।

- एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहन कुमार की मौत 25 जनवरी 2019 को हार्ट अटैक से हो गई। वह इंडियन एसोसिएशन ऑफ पिडियाट्रिक्स (आइएपी) के अध्यक्ष, सचिव सहित अन्य पदों पर रह चुके है।

आइएमए की सर्वे रिपोर्ट

- देशभर में आइएम की कुल 1500 शाखाएं संचालित हैं।

- 2.5 लाख डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं।

- करीब 82.7 फीसद डॉक्टर अपने पेशे में तनावग्रस्त हैं।

- करीब 76.3 फीसद डॉक्टरों को चिंतित रहने की शिकायत।

- अधिकांश डॉक्टरों को हार्ट, रक्तचाप और मधुमेह की शिकायत।

- 36.8 फीसद डॉक्टर अपने पेशे से पूरी तरह खुश हैं।

- 38.5 फीसद डॉक्टर कुछ हद तक ही अपने पेशे से संतुष्ट हैं।

- 24.7 फीसद डॉक्टर अपने पेशे से खुश नहीं है।

- 56 फीसद डॉक्टर अपनी व्यस्तता के कारण सात घंटे की नींद भी नहीं ले पाते।

- 62.8 फीसद डॉक्टर को मरीजों के इलाज के दौरान भी उन्हें मारपीट की चिंता सताती है।

- 24.2 फीसद डॉक्टरों को मुकदमे का भय।

- 13.7 फीसद डॉक्टरों को आपराधिक अभियोजन का डर।

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चिकित्सकों की हार्ट अटैक से लगातार हो रही मौत चिंता का विषय है। इसे लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है। अधिकांश डॉक्टर तनाव में है। वह खुद ही बीमार होंगे तो मरीज कौन देखेगा।

- डॉ. मृत्युंजय सिंह, सचिव, आइएमए।

Posted By: Jagran

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