जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : हरियाली तीज को छोटी तीज और श्रवण तीज के नाम से जाना जाता है। सावन महीने में होने वाले इस त्योहार को सुहागिन स्त्रियां करती है। ¨हदू मान्यता के अनुसार यह त्योहार पति के प्रति पत्‍‌नी समर्पण का प्रतीक है। कहा जाता है कि इस दिन गौरी-शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। सुहागिनों के पति दीर्घायु होते हैं।

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'यह त्योहार भोजपुरी समाज की महिलाएं करती हैं। अखंड सौभाग्य की कामना की इस त्योहार को हरतालिका तीज की अपेक्षा कम महिलाएं करती है। भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है। अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को कुंवारी लड़किया भी रख सकती हैं। क्योंकि मान्यता है कि मा पार्वती ने इस व्रत को शिवजी को पति रूप में पाने के लिए किया था'। -----

'इस व्रत में मा भगवान शिव और मा पार्वती का पूजन किया जाता है। तीज के इस व्रत मे कुछ लोग निर्जला उपवास भी करते है जो थोड़ा कठिन होता है। और जो साधारण उपवास करते है वे बीच मे फ ल एवं जुस का सेवन करते है। भोजपुरी सभ्यता -संस्कृति में इसका काफी महत्व है।'

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'हरियाली तीज को नेपाली समाज की महिलाएं भी मनाती है। हालांकि इसमें महिलाओं की संख्या कम है लेकिन जो भी इस पर्व को करती है वह काफी उत्साहित व प्रेम भावना से उपवास रखती है। इस दिन महिलाएं अपने संबंधी या समाज के लोगों से मिलती है तथा आपस मे नाच गान कर मादल बजाकर पुरा मनोरंजन करती है। फि र शाम को सुरज ढलने के बाद भगवान की आरती करके पूजा करते है एवं फ ल जुस का सेवन करते है'।

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'तीज के दूसरे दिन व्रती महिलाएं सुबह उठकर नहाने के बाद पूजा पाठ करके अपने पति के पाव धोकर उसी पानी को पीकर साथ में जौ का सत्तु खाकर अपना व्रत तोड़ती है। पति के द्वारा पत्‍‌नी कच्चु की सब्जी खिलाया जाता है एवं अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद देते है'।

By Jagran