जेएनएन,जमशेदपुर/राजनगर : कोल्हान प्रमंडल के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के हनुमातबेड़ा में बीते 23 अगस्त को डायन बिसाही के संदेह में विधवा मालहो मुर्मू की हत्या मामले में मुख्य आरोपित ओझा लाभा टुडू ऊर्फ भालू को पुलिस ने बुधवार को हनुमातबेड़ा गाव से गिरफ्तार किया। आरोपित ओझा फिर से हनुमातबेड़ा गाव में पूजा के लिए आया हुआ था। जैसे ही पुलिस को इसकी सूचना मिली। थाना प्रभारी यज्ञ नारायण तिवारी एवं एएसआई अनिल ओझा एवं सशस्त्र बल के साथ भोर तीन बजे ही हनुमातबेड़ा पहुंचे और आरोपित ओझा को धर दबोचा। आरोपित ओझा को कोर्ट में पेश किया गया जहां से न्यायिक हिरासत में सरायकेला जेल भेज दिया गया। घटना को ओझा समेत पाच लोगों ने अंजाम दिया था। आरोपितों ने 23 अगस्त की रात को साढ़े ग्यारह बजे अपने 14 वर्षीय इकलौते पुत्र चना मुर्मू के साथ सो रही मालहो मुर्मू की धारधार हथियार से वार कर हत्या कर दी थी। 24 अगस्त को पुत्र चना मुर्मू ने मा की हत्या का मामला थाना में दर्ज कराया। हत्या में ओझा समेत मालहो मुर्मू की जेठानी और उसके दो बेटे व एक बेटी शामिल थे। पुलिस ने हत्या के आरोपितों राजली देवी, चंपा मुर्मू,चना मुर्मू व लखन मुर्मू को पहले ही भेज दिया है। घटना के बाद से ओझा फरार चल रहा था। ओझा लाभा टुडू ओडिशा के तिरिंग थाना क्षेत्र के कोमराम गाव का रहने वाला है। वह गले में कई मालाएं एवं हाथों में अंगूठिया पहना हुआ था।

ओझा फैला रहे समाज में अंधविश्वास: थाना प्रभारी

थाना प्रभारी यज्ञ नारायण तिवारी ने लोगों को ओझा गुनी के चक्कर में न फंसने की अपील की है। थाना प्रभारी ने कहा कि आज भी आदिवासी बहुल इलाकों में अधिकतर अंधविश्वास के चलते लोगों की हत्याएं हो रही हैं। लोग ओझा गुनी के झासे में आकर निर्दोषों की डायन बता कर हत्या कर रहे हैं। यह सभ्य एवं शिक्षित समाज के लिए काफी काफी शर्म की बात है। थाना प्रभारी ने कहा कि गरीब और अशिक्षित परिवार ओझा के लिए सबसे आसान शिकार होते हैं। ऐसे परिवार में यदि कोई सदस्य बीमार होता है तो लोग उसे डॉक्टर के बजाय ओझा के यहां ले जाते हैं और ढोंगी ओझा अपनी मनगढ़ंत बातों से परिवार वालों का ब्रेन वाश करते हैं। उनके अंदर इतना अंधविश्वास फैला दिया जाता है कि ओझा जिसे डायन करार देता उसे ही लोग डायन समझ बैठते हैं। और हत्या जैसी बड़ी अपराध को करने से भी नहीं झिझकते। हमें समाज में सबसे पहले अंधविश्वास फैलाने वाले ऐसे ओझाओं को चिन्हित कर उनके ऊपर कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी होगी। साथ ही डायन बिसाही के प्रति लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है। इसके लिए हर तबके तक शिक्षा की रोशनी पहुंचानी होगी।

Posted By: Jagran