जमशेदपुर, जासं। इलेक्ट्रिक वाहन या ईवी का बाजार बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन इसमें सबसे पहला सवाल यही आता है कि इसे चार्ज कहां करेंगे। कहीं बीच रास्ते में फंस गए तो क्या करेंगे। लेकिन अब इन सब बातों को लेकर टेंशन लेने की आवश्यकता नहीं है।

सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए संशोधित दिशा-निर्देश और मानक लेकर आई है, जो मालिकों को अपने वाहनों को चार्ज करने के लिए घर और कार्यालयों में अपने मौजूदा बिजली कनेक्शन का उपयोग करने की अनुमति देता है।

एक महत्वपूर्ण कदम में मालिक अपने मौजूदा बिजली कनेक्शन का उपयोग करके अपने निवास या कार्यालय पर अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज कर सकते हैं। सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ लंबी दूरी की ईवी और या भारी शुल्क वाले ईवी के लिए सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यकताओं को रेखांकित किया गया है।

मानक के अनुसार कोई भी खोल सकता चार्जिंग स्टेशन

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 14 जनवरी को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए संशोधित समेकित दिशा-निर्देश और मानक जारी किया है। इसके मुताबिक कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना लाइसेंस की आवश्यकता के सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए स्वतंत्र है। बशर्ते कि गाइडलाइंस का अनुपालन करें। पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (पीसीएस) के लिए अनुपालन आवश्यकताओं की एक विस्तृत सूची को भी रेखांकित किया गया है। इसमें नागरिक, बिजली और सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त बुनियादी ढांचे के मानक शामिल हैं।

कुल मिलाकर इसका उद्देश्य सुरक्षित, भरोसेमंद, सुलभ और किफायती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इको-सिस्टम सुनिश्चित करके भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने में सक्षम बनाना है। यह पूरे ईवी पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देकर देश की ऊर्जा सुरक्षा और उत्सर्जन तीव्रता में कमी को बढ़ावा देगा। इस आदेश ने ना केवल बाजार में उपलब्ध प्रचलित अंतरराष्ट्रीय चार्जिंग मानकों, बल्कि नए भारतीय चार्जिंग मानकों को भी प्रदान करके दिशा-निर्देशों को और अधिक स्वीकार्य बना दिया है।

सरकारी कार्यालयों-प्रतिष्ठानों में भी दी जाएगी जगह

यदि कोई व्यक्ति या संस्था सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के कार्यालय या प्रतिष्ठान परिसर में चार्जिंग स्टेशन खोलना चाहता है, तो उसे भी एक नियम के तहत जगह दी जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास के लिए चार्जिंग स्टेशन को वित्तीय रूप से व्यवहारिक बनाने के लिए इसके लिए उपयोग की जाने वाली भूमि के लिए एक राजस्व-साझाकरण मॉडल रखा गया है।

सरकार या सार्वजनिक संस्थाओं के पास उपलब्ध भूमि सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए एक सरकारी या सार्वजनिक संस्था को राजस्व-साझाकरण के आधार पर भूमि को भुगतान की जाने वाली 1 / kWh (चार्जिंग के लिए प्रयुक्त) की निश्चित दर पर प्रदान की जाएगी। यह करार तिमाही आधार पर भी हो सकता है।

एक रुपये प्रति किलोवाट की दर पर मिलेगी जगह

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत एक मॉडल रेवेन्यू शेयरिंग एग्रीमेंट को भी शामिल किया गया है। इस तरह के राजस्व बंटवारे के समझौते को शुरू में पार्टियों द्वारा 10 साल की अवधि के लिए दिया जा सकता है। सार्वजनिक भूमि-स्वामित्व वाली एजेंसी द्वारा एक निजी इकाई को सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए बोली के आधार पर एक रुपये प्रति किलोवाट के न्यूनतम मूल्य के साथ भूमि उपलब्ध कराने के लिए राजस्व साझाकरण मॉडल भी अपनाया जा सकता है।

Edited By: Jitendra Singh