जासं, जमशेदपुर : ईश्वरीय कृपा के लिए संयम, धैर्य और विश्वास की आवश्यकता है। यहां देर संभव है मगर अंधेर नहीं। विश्वास के सहारे ही प्रभु की कृपा व लीला का साक्षात दर्शन होता है। कथावाचक हिमाशु महाराज राधा चारणोपासक ने विश्वास, धैर्य और मोक्ष को केंद्रित करते हुए उक्त बातें कही। बिष्टुपुर स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर में सात दिवसीय श्रीमदभागवत कथा का सोमवार को विश्राम हुआ। कथा के अंत में पूर्णाहुति हवन भी किया गया, जिसमें सातों दिन के यजमान के साथ साथ मंदिर प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने सपरिवार हिस्सा लिया। राज्य के मंत्री सरयू राय भी कथा के विश्राम के मौके पर कथा स्थल पहुंचे। उन्हें कथावाचक हिमाशु महाराज ने अंग वस्त्र ओढ़ा कर सम्मानित किया।

बड़े नाम के लिए बड़ा काम करना पड़ता है

श्री कृष्ण जीवन की पुन: चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे कामों से पहचान संभव है, लेकिन बड़े नाम के लिए बड़ा काम यानी कठिन जतन करना पड़ता है। छोटी उम्र में प्रभु ने कठिन काम कर अपनों का विश्वास जीता। बातों से रिझाना और अपना काम निकलवाना भी आज की एक कला है मगर पुरुषार्थ तो हकीकत में करना ही होगा। कथावाचक हिमाशु महाराज ने कहा कि पीड़ा देना आसान है, लेकिन इसकी वास्तविक व्यथा को जानने से मर्म का ज्ञान होता है। श्रीकृष्ण की शक्ति आधार राधा अमरत्व की वजह से हर युग मे पूच्यनीय है।

आतिशबाजी के साथ निकली शोभायात्रा

कथा विश्राम के बाद श्रीमदभागवत पुराण की पूजा हुई। इसके बाद भागवत पुराण को लेकर कथावाचक हिमाशु महाराज के साथ श्रद्धालुओं ने ढोल नगाड़ों के साथ नगर भ्रमण किया। शोभायात्रा आयोजन स्थल से आरंभ होकर मुख्य मार्ग की परिक्रमा करते हुए पुन: मंदिर पहुंची। इस दौरान आतिशबाजी भी की गई। कथा विश्राम के मौके पर संतोष संघी, सुरेश आगीवाल, कमल बाकरेवाल, कमल आगीवाल, कुंज बिहारी नागेलिया, रामावतार अग्रवाल, अशोक गोयल, सुरंजन राय समेत कई श्रद्धालु शामिल हुए।

Posted By: Jagran

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