जमशेदपुर, जासं।  लॉकडाउन में लोगों को जिला प्रशासन के पास अपनी फरियाद सुनाने में काफी दिक्कत हो रही है। डीसी ऑफिस का शिकायत कोषांग बंद कर दिया गया है। आम जनता को डीसी ऑफिस आने की इजाजत नहीं है।

आम जनता की शिकायत के लिए बने जिला नियंत्रण कक्ष का मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ है। लोगों का आरोप है कि जिला नियंत्रण कक्ष का लैंडलाइन नंबर काफी मुश्किल से मिलता है। शिकायत सुन भी ली गई तो उसका निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इससे लोगों में नाराजगी है। लोगों की शिकायतें सुनने के लिए अधिकारी भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में जनता अपनी फरियाद सुनाए तो किसे सुनाए। इस संबंध में डीसी को अवगत कराया गया। लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

लॉकडाउन शुरू होते ही हो गई थी बंदी

जमशेदपुर में 21 दिन का लॉकडाउन शुरू होते ही जिला प्रशासन ने डीसी ऑफिस को आम जनता के लिए बंद कर दिया था। आम जनता को अपनी शिकायत या डिमांड के लिए जिला नियंत्रण कक्ष को फोन करने की सलाह दी गई है। इस संबंध में डीसी ऑफिस में एक बैनर भी टांग दिया गया है कि अगर किसी को जिला प्रशासन से कोई फरियाद करनी है या कोई शिकायत करनी है तो वह जिला नियंत्रण कक्ष को फोन करें। इस बैनर में दो नंबर लिखे गए हैं। एक मोबाइल नंबर है, दूसरा लैंडलाइन नंबर है। जिला नियंत्रण कक्ष का मोबाइल नंबर स्विच ऑफ है। बताते हैं कि लोग इस नंबर पर लगातार फोन कर रहे हैं। लेकिन स्विच ऑफ होने की वजह से वह जिला प्रशासन तक अपनी बात नहीं पहुंचा पा रहे हैं।

ये कहते भुक्‍तभोगी

टेल्को के दीपक ने बताया कि गुरुवार की सुबह 11 बजे बजे से वह लगातार नियंत्रण कक्ष के मोबाइल नंबर पर फोन लगा रहे हैं। लेकिन वह नंबर स्विच ऑफ बता रहा है। जबकि लैंडलाइन नंबर पर फोन करने पर वह बराबर बिजी बताता है। इसके चलते वो अपनी शिकायत जिला प्रशासन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। मानगो के उलीडीह के राजू वर्मा बताते हैं कि बुधवार को उन्होंने जिला नियंत्रण कक्ष में फोन लगाकर इलाके में महाराष्ट्र के एक युवक के होने की जानकारी देनी चाही। लेकिन कई बार फोन करने पर भी फोन बराबर बिजी बताता रहा। थक हारकर उन्होंने उलीडीह थाने को फोन लगाया और इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां पहुंची।

कंट्रोल रूम का मोबाइल डिस्चार्ज, दूसरे कमरे में पड़ा

 जिला नियंत्रण कक्ष के मोबाइल नंबर के स्विच ऑफ होने के बारे में जब एक अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने इस संबंध में बताया कि लैंडलाइन फोन बराबर बिजी रहते हैं। इसलिए हो सकता है कि कोई फोन लगाए और ना लगे। मोबाइल फोन के बारे में उन्होंने बताया कि एक फोन शायद डिस्चार्ज हो गया है। दूसरे कमरे में पड़ा हुआ है। अधिकारी का कहना था की वह इस फोन का इस्तेमाल लोगों का फीडबैक लेने के लिए करते हैं। यानी उनसे पूछा जाता है कि उनकी शिकायत निस्तारित हुई कि नहीं। लेकिन लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर यह फोन डिस्चार्ज है तो इसकी बैटरी चार्ज क्यों नहीं की गई। जबकि जिला प्रशासन ने इसका नंबर बैनर पर जिला नियंत्रण कक्ष के तौर पर जारी किया है। अगर यह मोबाइल नंबर शिकायत लेने के लिए जारी किया गया है। तो फिर इसका फीडबैक में क्यों इस्तेमाल हो रहा है। अगर इसका फीडबैक में इस्तेमाल किया जा रहा है तो जिला प्रशासन को बैनर से यह नंबर हटा देना चाहिए।

खाद्यान्न और बीमारों के बारे में ही आ रही शिकायतें

जिला कंट्रोल रूम में इन दिनों बस्तियों में खाद्यान्न नहीं पहुंचने और बीमारों के देखे जाने की ही शिकायतें की जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब भी कंट्रोल रूम में किसी बस्ती में खाद्यान्न नहीं पहुंचने की शिकायत आती है तो इससे संबंधित अधिकारी को अवगत कराया जाता है। इसके बाद जिला प्रशासन संबंधित बस्ती में खाद्यान्न पहुंचाने की कवायद शुरू करता है। बीमारों के बारे में जानकारी आने पर स्वास्थ्य विभाग को बताया जाता है और स्वास्थ्य विभाग संबंधित व्यक्ति को लाकर उसकी जांच शुरु करता है।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

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