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झारखंड के दलमा सेंचुरी 3 साल बाद हुई हाथियों की वापसी, पुराने कोरिडोर से पहुंचा 38 हाथियों का झुंड

Published: Sat, 18 Apr 2026 02:53 PM (IST)

दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में तीन साल बाद 38 हाथियों का झुंड अपने पारंपरिक गलियारे से लौटा है, जिसमें पांच बच्चे ...और पढ़ें

दलमा में हाथियों की वापसी। फाइल फोटो

दलमा में हाथियों की वापसी। फाइल फोटो

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मनोज सिंह, जमशेदपुर। दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में तीन वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 38 हाथियों का झुंड अपने पारंपरिक एलीफेंट कोरिडोर से वापस पहुंचा है। 38 हाथियों के झुंड में पांच बच्चा शामिल है।

इससे वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय बाद दलमा जंगल में हाथियों की चिंघाड़ गूंजने लगी है, जो प्राकृतिक संतुलन के लिहाज से भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

हाथियों का यह यह झुंड पश्चिम बंगाल सीमा के पास स्थित काकराझोर-बुरूडीह-नरसिंहपुर-सुकलाड़ा-डालापानी-आमदा पहाड़ी मार्ग से होते हुए दलमा के अंदर जलस्रोत मंझला बांध के पास पहुंच गया। यह वही पुराना रास्ता है, जिससे होकर हाथी वर्षों से अपने प्राकृतिक आवास तक आते-जाते रहे हैं।

जमशेदपुर वन प्रमंडल के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि बीते तीन वर्षों में हाथियों के भटकने के कारण चाकुलिया, बहरागोड़ा और घाटशिला के रिहायशी इलाकों में जान-माल का नुकसान बढ़ गया था।

हाथियों का अपने पारंपरिक मार्ग से विचलित होना ही मानव-हाथी संघर्ष की बड़ी वजह बना। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम लगातार सक्रिय थी।

रात के समय मशाल, धुआं, पटाखे और ड्रैगन टार्च का इस्तेमाल कर हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश की गई। अब जब हाथियों का झुंड अपने पुराने कोरिडोर से दलमा लौट आया है, तो उम्मीद है कि भविष्य में जान-माल का नुकसान में कमी आएगी।

DFO सबा आलम अंसारी कहते हैं कि तीन साल बाद एक साथ 38 हाथियों का अपने प्राकृतिक मार्ग पर लौटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। यदि प्राकृतिक मार्ग सुरक्षित और संरक्षित रहें, तो वन्यजीव अपने आप संतुलन बनाए रखते हैं। - सबा आलम अंसारी, डीएफओ, जमशेदपुर