जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : बर्मामाइंस थाना अंतर्गत श्रीराम आश्रम बस्ती में पुलिस के पहरा के बावजूद चोरों ने चार घरों के ताले व खिड़की तोड़कर हजारों रुपये का सामान चुरा लिया। ये वही बस्ती है, जहां के बस्तीवासी पिछले दिनों दो समुदायों के बीच हुई झड़प के बाद दहशत के कारण अपने घरों को छोड़ आश्रम में आश्रय लिए हुए हैं। उनके घर तालाबंद हैं, सो चोरों ने आसानी से चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोरी से बस्ती के लोग परेशान हैं। उनकी यह परेशानी तब और बढ़ गई, जब चोरी की सूचना जब बर्मामाइंस थाना प्रभारी को दी गयी और उन्होंने उल्टे बस्तीवासी को ही नसीहत देते हुए कह गिया कि जब आपलोग अपने घर में नहीं रहेंगे तो क्या होगा? थाना प्रभारी की बात सुनकर बस्तीवासियों में रोष है।

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चोरी की खबर सुन बेहोश हो गई महिला

अपने बंद घर में चोरी की घटना की जानकारी मिलते ही सालमी बोयपाई नामक महिला बेहोश होकर गिर गई। वह जोर-जोर से चिल्ला-चिल्ला कर रोने लगी। चोरों ने उसके घर में छिपा कर रखे पायल, कान की बाली, मैडल व रुपये की चोरी कर ली। उसे तत्काल पुलिस गाड़ी में सदर अस्पताल ले जाया गया।

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सवालों के घेरे में पुलिस की मुस्तैदी

बस्ती के घरों जिसमें सालमी बोयपाई के अलावा सोमवारी सोरेन, रायबारी दास तथा बुचिया देवी के घरों को चोरों ने निशाना बनाया। चोर चोरी करने के बाद अपना सब्बल भी छोड़ दिया था। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि बस्ती के नीचे की ओर पुलिस का अस्थायी कैंप है। पुलिस की पेट्रोलिंग हो रही है, इसके बावजूद चोरी हो जाना अपने आप में प्रश्न खड़ा करता है।

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आश्रम से भी पलायन के मूड में बस्तीवासी

बर्मामाइंस में बवाल के बाद ले दहशत के कारण आश्रम में आश्रय लिए बस्तीवासियों का कहना है कि चूंकि बस्ती की एक महिला की मौत तीन दिन पूर्व हो गयी, इसलिए वे लोग आश्रम में रुके हुए हैं, अन्यथा वे आश्रम छोड़ कर कहीं अन्यत्र चले जाते, क्योंकि सुरक्षा देने के नाम पर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने उनसे वादाखिलाफी की है। उनका कहना है कि बस्ती में दो बंडल कंटीली तार गिरा देने के बाद अब तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हो पाया है। बस्ती में स्ट्रीट लाइट लगा दिया गया है, इसके बावजूद चोरी की घटना घटी है।

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दो समुदाय के तनाव के बाद करना पड़ा था पलायन

श्रीराम आश्रम में रहने वाले अधिकांश लोगों का घर बीते छह जनवरी को दूसरी बस्ती के लोगों ने तोड़फोड़ कर तहस नहस कर दिया था। किसी तरह रात बिताने के बाद श्रीराम आश्रम के सभी 46 परिवार घर छोड़ कर विनोवा आश्रम में आश्रय लेने पर मजबूर हो गए थे, दूसरे दिन भाजपा नेताओं व पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा, घेराबंदी कराने व मकान बनाने का आश्वासन के बाद पलायन किए लोग वापस लौट गए। हालांकि फिलहाल सभी लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। स्त्री-पुरूष, बच्चे बूढे एक ही हॉल में सोने को मजबूर हैं। बता दें कि बर्मामाइंस के श्रीरामआश्रम के पास छेड़खानी को लेकर दो समुदायों के बीच बीते छह जनवरी को भिड़ंत हो गई थी। जिसमें दोनों पक्ष के करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे। स्थिति पूरी तरह तनावपूर्ण थी। लोगों के घर को तोड़फोड़ कर सामान को भी नष्ट कर दिया गया था।

Posted By: Jagran

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