घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम), जेएनएन। Coronavirus Lockdown वैश्विक संकट बनकर सामने आए कोरोना वायरस (Covid 19) और इसके संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन ने कई मिथक तोड़े हैं तो कई गढ़े भी हैं। लॉकडाउन की बंदिशों में जीने की मजबूरी के बीच गांवों में दिख रहे बदलाव सुखद अहसास भी दे रहे हैं। इस दौरान जिन चेहरों की अहलदा और नई पहचान बनी है, वह है पुलिस की। सुदूर जंगली इलाकों में बसे गांवों में आलम यह है कि जिस पुलिस की जीप को देख लोग भागते थे, आज उसी का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं।

 लॉकडाउन से पहले तक पुलिस की जीप को दूर से देख ही लोग डर से भाग खड़े हो जाते थे। हां भले यह नक्‍सलियों की हनक वाला इलाका था। बड़े हमेशा बच्चों और नौजवानों को कहते थे कि बदमाशी मत कर नहीं तो पुलिस आ जाएगी। हमेशा पुलिस की जीप को देख ऐसा लगता था कि उसमें बैठे अधिकारी उन्हें फटकार लगाएंगे, डंडे बरसाएंगे।यही नहीं, जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। इसलिए लोग जीप देख दूर हट जाते थे या फिर घर के अंदर चले जाते। लेकिन अब उसी जीप का हर रोज लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। क्योंकि पुलिस वाले आज फरिश्ता बनकर उसी जीप से प्रत्येक दिन जरूरतमंदों के लिए भोजन पहुंचाते हैं। इसलिए अब सभी को इंतजार रहता है। लोगों को यह भरोसा रहता है कि पुलिस हर रोज मदद लेकर उनके पास पहुंचेगी।

नियत समय पर जरूरतमंदों के घर पहुंचता खाना

पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला अनुमंडल इलाके  के मऊभंडार थाना की पुलिस सामुदायिक किचन के माध्यम से क्षेत्र की लोगों की मदद में जुटी है। प्रत्येक दिन नीयत समय पर पुलिस की जीप भोजन लेकर गांव-गांव पहुंच रही है और जरूरतमंदों को परोस नहीं है। आम दिनों में भी दो जून की रोटी की चिंता में डूबते-उतराते रहनेवाले ग्रामीण भरपेट भोजन कर पुलिस को जी भर आशीष लुटा रहे हैं। पुलिस की जीप देखते ही लोग हिदायत के अनुरूपअपने घरों के बाहर शारीरिक दूरी का अनुपालन करते हुए कतारबद्ध खड़े हो जाते हैं और पुलिस अधिकारी व कर्मी उन्‍हें खाना परोसते हैं।

थानों में संचालित हो रहे सामुदायिक किचन

दरअसल, पूर्वी सिंहभूम पुलिस की ओर से लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को भोजन उपलब्‍ध कराने के लिए खास पहल की है। जिले के सभी थानों में सामुदायिक किचन बनाए गए हैं। यहां भोजन तैयार कर वितरण किया जाता है। इससे उस बड़े तबके को फायदा मिल रहा है जो अनाज उपलब्‍ध होने के बावजूद उसे पका पाने में सक्षम नहीं है। इतना ही नहीं, पुलिस ग्रामांचलों में सूचना पर जरूरतमंदों के घर अनाज और अन्‍य खाद्य सामग्री भी पहुंचा रही है। पुलिस की इस पहल से खासकर ग्रामांचलों में पुलिस पर लोगों का भरोसा जगा है। पुलिस कसे लोग मित्रवत मानने लगे हैं।

राहगीरों का भी सहारा

ग्रामीण क्षेत्र के मुसाबनी थाने का समुदायिक किचेन भी जरूरमंद ग्रामीण और दूर -दूर से आ रहे राहगीरों के लिए वरदान साबित हो रहा है। सामुदायिक किचेन में बना भोजन प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीणों व दर्जनों राहगीरों को मिल रहा है। लॉकडाउन में फंसे मजदूरों व अन्य लोगों को भी दोनों वक्त का भोजन मुसाबनी पुलिस मुहैया करा रही है। मुसाबनी थाना प्रभारी संजीव कुमार झा कहते हैं- पूरे थाना क्षेत्र में असहाय व जरूरतमंद लोग भूखे न रहे इसी को लेकर सामुदायिक किचन काम कर रहा है। किचन 29 मार्च  से मुसाबनी थाना में चल रहा है। अभी तक पांच हजार से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है।

मास्‍क का भी वितरण

मुसाबनी थाना की तरफ से करीब 500 मास्क एवं 200 लाइफबॉय साबुन भी जरूरतमंद लोगों के बीच वितरण किया गया है। भोजन मुख्यत: न्यू कॉलोनी, मैगजीन कॉलोनी, बेनाशोल, टेटाबदिया, सुरदा, डुंगरीडीह, बादिया, हरिजन बस्ती आदि जगहों पर बांटा जाता है। इसके अलावे सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी जरूरतमंद लोगों के बीच भोजन का वितरण किया जा रहा है।

शिक्षक भी कर रहें श्रमदान,मास्क बनाकर दे रहे थाना प्रभारी को 

शिक्षक भी आपातकाल में पुलिस के दोस्‍त बन गए हैं। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की मुसाबनी प्रखंड अध्यक्ष सह उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय तालाडीह सुरदा के प्रभारी प्रधानाध्यापक राज कुमार रौशन के नेतृत्व में शिक्षक सुजीत कुमार कर्ण, सुरेंद्र प्रसाद,प्रदीप कुमार महतो, दिनेश मालाकार,अम्बर सिंहा, धनंजय कुमार, बसंत लाल,कुलानंद अरगरिया, अरुण कुमार आदि लॉक डाउन में कोरोना वायरस से बचाव के लिए कलम छोड़ सिलाई मशीन पर फेस मास्क बनाने में दिन रात जुटे हैं। मकसद यह कि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों को मास्क मुहैया कराया जा सके। शिक्षकों ने श्रमदान कर अपने हाथों से बनाए गए 550 पीस मास्क को मुसाबनी थाना प्रभारी संजीव कुमार झा को सौंपा ताकि प्रशासन के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को मास्क उपलब्ध कराया जा सके। अभी तक शिक्षकों ने दो हजार से अधिक मास्‍क बनाकर पुलिस को सौंपा है। 

Posted By: Rakesh Ranjan

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