जमशेदपुर, जासं। झारखंड सरकार ने दुर्गापूजा को लेकर जो भी दिशा-निर्देश जारी किए थे, विसर्जन के दिन वह सारी बंदिशें टूट गईं। मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन पर स्वर्णरेखा व खरकई नदी घाट पर श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ जुटी। कॉलोनी से धूमधाम के साथ मां को नाचते-गाते हुए विदाई दी गई, जो नदी घाट तक जारी रहा। सोसाइटी-कॉलोनी से लेकर सार्वजनिक पूजा पंडालों से प्रतिमा का विसर्जन सुबह करीब 10 बजे से ही शुरू हो गया था। नियम के मुताबिक पांच लोगों को ही एक प्रतिमा के साथ घाट पर पहुंचना था, लेकिन यह संख्या सैकड़ों तक पहुंच गई। 

कई लोग कार व बाइक से परिवार के साथ नदी तट पर पहुंचे, जहां महिलाओं ने एक बार मां को सिंदूर खेला मनाते हुए विदाई दी। डंका, ढाकी, ढोल के साथ नाचते-गाते हुए प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इससे पहले सोसाइटी व कालोनी के अलावा सार्वजनिक पूजा पंडालों में भी हर्षोल्लास के साथ मां की प्रतिमा को वाहनों पर सवार किया गया। नदी घाट पर सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं का खूब उल्लास दिखा। इस दौरान शारीरिक दूरी के बंधन का पालन तो नहीं हुआ, कई लोगों ने मास्क पहनना भी जरूरी नहीं समझा। हालांकि, नदी घाट पर जिला प्रशासन के अधिकारी व काफी संख्या में पुलिस बल भी तैनात थे, लेकिन किसी ने श्रद्धालुओं को रोकने या टोकने की कोशिश नहीं की। 

नवमी को भी सड़कों पर दिखी थी भीड़

वैसे भी नवमी के दिन ही कोरोना के नियम टूटते हुए दिखे। शाम को सड़कों पर काफी भीड़ दिखी। श्रद्धालु एक से दूसरे पंडाल में जाकर देवी दुर्गा की प्रतिमा का दर्शन करने पहुंच रहे थे। जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय व भाजपा नेता देवेंद्र सिंह समेत अन्य नेताओं ने शहर के पूजा पंडालों में मां का दर्शन किया। अष्टमी तक कोरोना के नियमों का पालन किया गया, लेकिन नवमी और दशमी को इसका पालन का नहीं के बराबर हुआ।

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