जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : मंदी को वजह बताकर यदि किसी कंपनी प्रबंधन ने ठेका कर्मचारियों को काम से बैठाया, तो प्रबंधन को काम से बैठाए गए ठेकाकर्मियों को आधे दिन का वेतन देना होगा। इस मांग के साथ यूथ इंटक के राष्ट्रीय महासचिव सह टाटा वर्कर्स यूनियन के सहायक सचिव नितेश राज ने झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (केस संख्या 7210/2019) दायर की है।

बिष्टुपुर स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता कर नितेश राज ने यह जानकारी दी। बकौल नितेश, कोई भी कंपनी प्रबंधन अपना घाटा बचाने के लिए किसी भी ठेकाकर्मी को काम से बैठाकर भूखे मरने के लिए नहीं छोड़ती। क्योंकि काम से बैठाने के बाद पूरे परिवार के समक्ष भूखमरी की समस्या उत्पनं हो जाती है और वे मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करते हैं। नितेश ने वर्ष 2019 में आई आर्थिक मंदी के कारण जमशेदपुर में जिन दो ठेकाकर्मियों ने आत्महत्या (प्रभात कुमार और आशीष कुमार) की, उसे ही अपनी याचिका का आधार बनाया है। उनका कहना है कि कंपनी बंद हो या ठेकाकर्मियों को काम से बैठाए, प्रबंधन को ठेका कर्मचारियों को आर्थिक मदद देनी होगी। नितेश ने दावा किया कि कोल्हान में 1500 छोटी बड़ी कंपनियां है। इसमें लगभग तीन लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें 75 फीसदी ठेकाकर्मी कार्यरत हैं। प्रेसवार्ता में यूथ इंटक के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पांडेय, यूथ इंटक के जिलाध्यक्ष अंजनी पांडेय, सरायकेला-खरसावां के जिलाध्यक्ष अवधेश सिंह, धनंजय कुमार, पुष्कर, जेपी लेंका, सीएसपी सिंह, दिलीप उपाध्याय उपस्थित थे।

याचिका में झारखंड सरकार को बनाया है पार्टी :

नितेश राज ने अपनी याचिका में झारखंड सरकार के प्रधान सचिव और उद्योग विभाग के सचिव को पार्टी बनाया है। उनकी मांग है कि झारखंड सरकार भी पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र की तरह ऐसा श्रम कानून बनाए जो ठेकाकर्मियों के हितों की रक्षा कर सके। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस मामले में झारखंड सरकार को ज्ञापन सौंपकर यह मांग करेंगे।

ठेका कर्मचारियों को करेंगे संगठित :

बकौल नितेश, ठेका कर्मचारियों के हक को प्रबंधन इसलिए नहीं देती है क्योंकि सभी असंगठित हैं। नितेश ने घोषणा की है कि वे जल्द ही यूथ इंटक के बैनर तले सदस्यता अभियान चलाकर उन्हें संगठित करेंगे और उनके हक की लड़ाई लड़ेंगे।

Posted By: Jagran

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