घाटशिला,मंतोष मंडल। पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को शौचालय के उपयोग के लिए जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चला। शौचालय सजाओ प्रतियोगिताएं हुईं। दीवारों को बेहतरीन सजाने पर प्रतिभागी पुरस्कृत भी किए गए। लाभुकों द्वारा उपयोग नहीं करने पर यह आकर्षण बेकार साबित रहा। खुले में शौच उनकी नियति बनी है, जो स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्य में सबसे बड़ी बाधा है। यह हाल है घाटशिला अनुमंडल से से सात किलोमीटर दूर सड़क किनारे बसे मुड़ाकाटी टोला का। यह टोला आदर्श ग्राम बड़ाजुड़ी में आता है।

लाभुक छाकु किस्कू ने बताया कि सरकार की योजना तो अच्छी है, लेकिन शौचालय भालो नाहीं यानि अच्छा नहीं बना है। बहुत छोटे स्क्वायर फीट में बने हैं। सेफ्टिक टैंक भी साढ़े तीन फीट का बना है जो जल्दी भर जाएगा है और आगे दिक्कत होगी। इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए इसका उपयोग नहीं करते हैं। ऐसी ही सोच पूरे टोला के ग्रामीणों की है। यहां करीब 100 घरों में 400 आबादी रहती है। बड़ाजुड़ी पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि कुछ शौचालयों का चयन कर उनकी दीवारों पर पेंटिग कराई गई, बेहतरीन रंगों का प्रयोग कर सजाया गया। जिससे लाभुक आकर्षित हों। साथ ही ग्रामीणों को प्रेरित करने के उद्देश्य से शौचालयों को सजाया गया था। लेकिन सब बेकार साबित हो रहा है। शौचालय दर्शनीय वस्तु बनकर रह गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के 80 फीसद घरों में शौचालय

जानकारी हो कि अभियान के तहत बड़े पैमाने पर घाटशिला प्रखंड में शौचालय बने। शहरी क्षेत्र छोड़ दे तो घाटशिला के ग्रामीण क्षेत्रों में 80 फीसद घरों में शौचालय बने हैं। पूर्वी सिंहभूम जिला ओडीएफ घोषित होने के बावजूद सोच का अड़ंगा लगा है। सिर्फ कागजी फाइलों में ओडीएफ की सार्थकता है। घरों में शौचालय का निर्माण दिखाकर प्रशासनिक अधिकारियों ने अभियान को सफल तो बता दिया लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके विपरीत हैं।

प्रखंड में 14 हजार बन चुके शौचालय

घाटशिला प्रखंड में लगभग 14 हजार शौचालय बनाए जा चुके हैं। योजना के तहत अब भी कई पंचायतों में शौचालय बनाने का काम चल रहा है। जमीनी रिपोर्ट को देखे तो इसमें आधे से भी कम भी शौचालय का उपयोग करते होंगे। अधिकांश लाभुकों के घरों में बने शौचालय बेकार साबित हो रहे हैं।

लगेंगे कैंप

प्रखंड में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाए जा रहे हैं। शौचालय बनने के बाद भी लोग उपयोग नहीं कर रहे हैं, यह संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो लाभुक से बता की जाएगी। शौचालय उपयोग करने के लिए प्रखंड स्तर पर कई जागरूकता कैंप चलाए गए हैं।

-संजय दास, बीडीओ, घाटशिला।

 

Posted By: Rakesh Ranjan