विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चांडिल बाईपास अंडरपास: 6 हजार छात्रों और हजारों ग्रामीणों की लाइफलाइन में दरारें, स्थानीय लोग बोले- हो उच्च स्तरीय जांच

Published: Sat, 11 Jul 2026 11:24 PM (IST)

चांडिल बाईपास पर 8.30 करोड़ रुपये के नए रेलवे अंडरपास में पहली बारिश के बाद खामियां उजागर होने पर रेलवे प्रशासन हरकत में आया और मरम्मत कार्य शुरू हुआ।

AI Generated Image.

AI Generated Image.

HighLights

  1. 8.30 करोड़ के चांडिल अंडरपास में पहली बारिश में खामियां उजागर।

  2. रेलवे प्रशासन ने संज्ञान लिया, ठेकेदार ने मरम्मत कार्य शुरू किया।

  3. स्थानीय लोग उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।

संसू, नीमडीह। चांडिल बाईपास स्थित करीब 8.30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुए नए रेलवे अंडरपास की बदहाली पर आखिरकार रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया है। 
 
पहली ही बारिश के बाद इस अंडरपास में निर्माण की गंभीर खामियां उजागर हुई थीं। दैनिक जागरण में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने और उच्चाधिकारियों द्वारा इस पर संज्ञान लेने के बाद अब मौके पर युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है। 
 
निर्माण कार्य से जुड़ी संवेदक संस्था (ठेकेदार) पानी के रिसाव वाले स्थानों को दुरुस्त करने और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत में जुट गई है।
 

पहली ही बारिश में खुली थी निर्माण की पोल

उद्घाटन से ठीक पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से बनी इस बड़ी परियोजना में दरारें आने और दीवारों से पानी टपकने की घटना सामने आई थी। अंडरपास के भीतर जलजमाव होने की खबर से इसकी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए थे। 
 
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि यदि काम पूरी ईमानदारी और तय मानकों के साथ हुआ होता, तो उद्घाटन से पहले ही पहली बारिश में मरम्मत की नौबत क्यों आती?
 

6 हजार छात्रों सहित हजारों ग्रामीणों की लाइफलाइन है यह मार्ग

यह अंडरपास केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि सिंहभूम कॉलेज चांडिल के करीब छह हजार छात्र-छात्राओं तथा कदमडीह बस्ती सहित आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों की सुरक्षित आवाजाही का मुख्य जरिया है। 
 
रेलवे फाटक बंद रहने के दौरान क्षेत्र के लोगों के पास यही एकमात्र सुरक्षित विकल्प बचता है। ऐसे में इसकी सुरक्षा और मजबूती को लेकर आम जनता की चिंता पूरी तरह स्वाभाविक है।
 

रेलवे ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिया था संज्ञान

इससे पहले रेलवे प्रशासन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर मामले की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों व निर्माण एजेंसी से जवाब-तलब करने की घोषणा की थी। 
 
इसी कार्रवाई के बाद अब रिसाव वाले हिस्सों पर विशेष केमिकल व सामग्री लगाकर सीलिंग का काम किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि केवल ऊपर से सतही मरम्मत कर देना ही काफी नहीं होगा। 
 
जरूरत इस बात की है कि पूरे अंडरपास के ढांचे की किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। यदि दोषी अधिकारियों और संवेदक की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो भविष्य में भी जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये इसी तरह प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ते रहेंगे।