जमशेदपुर/चांडिल, जेएनएन।  जमशेदपुर से सटे सरायकेला-खरसावां जिला स्थित चांडिल डैम का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। वहां आसपास के गांवों में डैम का पानी घुस रहा है, लिहाजा रविवार शाम को चांडिल डैम के नौ फाटक खोल दिए गए हैं। इसे लेकर पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन अलर्ट है।

मानगो में स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल बाढ़ का खतरा नहीं है। हालांकि शहर में रविवार को झमाझम बारिश होती रही, जिससे नदी के पानी में वृद्धि हो रही है। रविवार काे चांडिल डैम का जलस्तर लगभग 182 मीटर तक पहुंच गया। ईचागढ़ के रास्ते पर डैम का पानी घुसने से मिलन चौक, सिल्ली, कुकड़ू व तिरुलडीह क्षेत्र के लोगों का संपर्क मार्ग टूट गया है। डैम का जलस्तर बढ़ने से विस्थापित क्षेत्र में डेम का पानी जमा है। ईचागढ़ के रास्ते में जलजमाव होने से लोग नाव और ट्यूब से पार हो रहे हैं। विस्थापित क्षेत्र में तीन दिन से जलजमाव रहने के कारण लोग स्कूल में डेरा डालकर रह रहे हैं। विस्थापित गांव में डैम का पानी घुसने के कारण लोगों को पेयजल का संकट भी उत्पन्न हो गया है। गांव के चापाकल पानी में डूब गए हैं। लोगों को दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। नौ फाटक खोलने के बाद भी भी निचले हिस्से में बाढ़ जैसी उत्पन्न हो गई है।

विधायक सविता महतो ने किया ईचागढ़ गांव का दौरा,जाना विस्थापितों का हाल

विधायक सविता महतो ने रविवार को चांडिल डैम पहुंचकर डैम का जलस्तर का निरीक्षण किया। इस इस दौरान विधायक ने जलस्तर में कमी नहीं देख कर विभागीय अधिकारियों से बात की और दो रेडियल गेट को एक - एक मीटर खुलवाया। इसी क्रम में विधायक कार्यकर्ताओं संग डैम के पानी घुसे ईचागढ़ गांव पहुंची। इस दौरान विधायक ने लोगों से मुलाकात कर विस्थापितों का हालचाल जाना। इसी क्रम में विधायक ने ईचागढ़ गांव में घुसे डैम का पानी का जायजा लिया। इस दौरान विधायक ने विस्थापित लोगों से कहा कि डैम का 9 रेडियल गेट को खोला गया है। आप निश्चिंत रहें। जरूरत पड़ने पर डैम के सभी गेट खुलवाने का काम करेंगे। दौरा के क्रम में विधायक ने ईचागढ़ के प्रखंड विकास पदाधिाकरी सत्येंद्र महतो को जरूरी दिशा- निर्देश दिए। मौके पर पप्पू वर्मा, काबलु महतो, जिला सचिव बुद्धेश्वर मार्डी, प्रखंड अध्यक्ष नीताई उरांव, कृष्णा किशोर महतो, मुखिया प्रतिनिधि राखहरि सिंह मुंडा, उप मुखिया अमरनाथ यादव, अभय यादव, गणपति कैवर्त, सपन सिंह देव, पशुपति बागची आदि ग्रामीण उपस्थित थे।

 

 

Edited By: Rakesh Ranjan