जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : सिंहभूम चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के चुनाव में सोमवार तक विपक्ष जितना उत्साहित था, वह चुनाव के दिन नहीं दिखा। चैंबर भवन के नीचे टीम विजन का टेंट लगा तो था, लेकिन सुबह में गिनती के तीन लोग थे। दोपहर बाद कुछ चहल-पहल दिखी, लेकिन फिर सभी वोट करके इधर-उधर घूमते हुए दिखे। मंगलवार को यह उत्साह टीम भालोटिया में दिखा, जो सुबह से रात तक कायम रहा।

टीम भालोटिया ने चैंबर भवन से सटे राजस्थान भवन को हर बार की तरह कैंप कार्यालय बना रखा था। भवन के ऊपरी तल पर भोजन व नाश्ते की व्यवस्था थी, जिसका लोगों ने भरपूर लुत्फ भी उठाया। हंसी-ठिठोली के साथ टीम के सदस्य अलग-अलग समूह में चर्चा कर रहे थे। इस दौरान राजस्थान भवन के पास अध्यक्ष अशोक भालोटिया तो जमे ही थे, पूर्व अध्यक्ष सुरेश सोंथालिया पूरे माहौल पर नजर रखे हुए थे। उनका ध्यान सदस्यों को पूछ-पूछकर मतदान कराने पर थे। जब उन्हें दोपहर तीन बजे पता चला कि एक सदस्य ने मतदान नहीं किया है तो बरस पड़े। उसे जल्दी से आईडी कार्ड लाकर वोट डालने को कहा। सोंथालिया का कहना था कि जो सदस्य यहां मौजूद है और मतदान नहीं किया है, इससे खराब बात क्या होगी। उधर, महासचिव पद के उम्मीदवार भरत वसानी भी लगातार चहलकदमी करते नजर आए, तो उपाध्यक्ष विजय आनंद मूनका समेत टीम भालोटिया के कार्यसमिति सदस्य वाले उम्मीदवार मतदाताओं से आशीर्वाद मांग रहे थे।

तीन बजे तक पड़ गए थे 1195 वोट

सिंहभूम चैंबर में 1737 सदस्य हैं, जिसमें दोपहर तीन बजे तक 1195 वोट पड़ गए थे। 20-22 सितंबर तक ई-वोटिंग की सुविधा था, जिसमें 487 सदस्यों ने मत का प्रयोग कर लिया था। शेष सदस्यों के लिए चैंबर भवन में ई-वोटिंग और बैलट पेपर की व्यवस्था थी। दोपहर तीन बजे तक चैंबर भवन आकर 708 सदस्यों ने मतदान कर लिया था। इसके बाद भी मतदाताओं की कतार लगी थी, जिससे लोग उम्मीद कर रहे थे कि 70 फीसद से ज्यादा मतदान होगा।

होती रही एनसीएलटी पर चर्चा

चैंबर चुनाव रोकने के लिए कुछ सदस्यों ने एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में याचिका दायर की थी। यह अलग बात है कि पहली ही सुनवाई में याचिका को एनसीएलटी ने अयोग्य ठहरा दिया, लेकिन उसकी चर्चा जारी है। सोमवार को एजीएम में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि जिन लोगों ने एनसीएलटी में याचिका दायर की है, उन्हें चैंबर से बाहर किया जाए। मतदान के दौरान चर्चा में यह बात सामने आई कि इसमें चार ऐसे लोगों ने हस्ताक्षर किया था, जो खुद पदाधिकारी या कार्यसमिति सदस्य रह चुके हैं। यानी उन्होंने याचिका में हस्ताक्षर करके खुद को अयोग्य साबित कर दिया है।

बिना पर्ची के हॉल में प्रवेश नहीं करने दे रहे थे सुरक्षाकर्मी

चैंबर भवन के जिस हॉल में मतदान हो रहा था, वहां सुरक्षाकर्मी पूरी तरह मुस्तैद थे। पुलिस बल के जवान भी आसपास तैनात थे। हॉल में उसी को प्रवेश करने दिया जा रहा था, जिसके पास मतदान पर्ची और आईडी कार्ड हो। मतदान करने के बाद पीछे के दरवाजे से मतदाता को बाहर निकलने दिया जा रहा था। इसके अलावा मतदानकर्मी या चैंबर के पदाधिकारी को जाने दिया जा रहा था।

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